आगरा

आत्मविश्वास आपकी आंतरिक शक्ति होती है। आपकी प्राथमिकता अपनी आंतरिक शक्तियों के आकलन की होनी चाहिए। अगर आपके पास ऐसा करने की क्षमता नहीं है तो आपका हर काम अधूरा ही रह जाएगा।

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असफलता इस बात का संकेत है कि हमने ईमानदारी से अपनी मंजिल पाने की कोशिश नहीं की। अपना लक्ष्य प्राप्त करने की राह में नाकामयाबी सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है। कम ही लोग हैं जो नाकामयाबी से नहीं डरते। असफलता हमारे जीवन का एक हिस्सा है इसके बिना हम जिंदगी का मतलब नहीं समझ सकते। असफलता ही हमें पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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श्रम का श्रेष्ठ उपयोग करने एवं अनावश्यक बर्बादी से बचाने का एक बेहतरीन तरीका है कि किस समय आप क्या करेंगे, उसकी योजना बनाएं। मगर इसके लिए जरूरी है कि आपके पास कितना समय है, इसका सही निर्धारण कीजिए। साथ ही साथ यह भी ध्यान रहे कि योजना का मतलब यह नहीं कि उसमें कोई लोच न हो।

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भारत जल संकट के दौर से गुजर रहा हैं। यद्यपि भारत मे प्रचुर जल संसाधन हैं। लेकिन, कोई भी ऐसा नहीं हैं। जिसे आज मानवकृत प्रदूषण ने नहीं घेरा हो।

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दया भावना इंसान की एक ऐसी खूबी है जो उसे स्वत: अच्छाइयों की ओर ले जाती है। इसमें किसी को क्षमा करने की भावना आपको ऐसी प्रवृत्ति की ओर ले जाती है कि नुकसान पहुंचाने वाले को भी आप क्षमा कर सकें। आप महसूस कर सकते हैं कि ऐसा कहना तो आसान है पर व्यावहारिक रूप में लाना मुश्किल। आपका कहना सही है। लेकिन, आप कुछ विशेष है इसलिए आप ऐसा कर सकते है।

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किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करने से पहले उस पर विस्तृत विचार-विमर्श करें। आपके कुछ कार्य बहुत अच्छे परिणाम और प्रभाव लाते है। आपका ध्यान उन चीजों को करने में होना चाहिए जिससे सबसे ज्यादा प्राप्ति हो। इस प्रकार आप अपनी उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। 80-20 का नियम रखें, यह निरूपित करता है कि 20 प्रतिशत गतिविधि 80 प्रतिशत परिणाम लाती है।

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आपका चरित्र लोगों को बताता है कि आप क्या है। आपका चरित्र ही आपका व्यक्तित्व बताता है। आपको कई बार ऐसे लोग मिले होंगे जो अपने बारे में हांकते तो ज्यादा हैं पर वास्तविकता कुछ और होती है। आपने वह कहावत भी जरूर सुनी होगी कि कुछ देर के लिए तो आप किसी को बेवकूफ बना सकते हैं, पर ज्यादा समय तक आप कोई भी सच्चाई छिपा नहीं सकते।

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उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के दौर में आज हर आदमी स्कैनर के अंदर है। आप अपने लैपटॉप पर गूगल में अपना घर देख सकते हैं। इसने हमारी जिंदगी को और ज्यादा उलझा दिया है और हम इस बड़े बाजार में खो-से गए हैं।

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आप जितना कर सकते हैं, उससे ज्यादा करने की कोशिश न करें। अपनी गतिविधियों की छंटनी शुरू कर दीजिए और फिर अपनी कार्य-सूची पर पुनर्विचार कीजिए। जो चीजें बेकार एवं महत्वहीन हैं, उन्हें बाहर कर दीजिए।

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जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है, सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं उस समय यह बोध कथा "कांच की बरनी और दो कप चाय" हमें याद आती है।

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