मथुरा। देश भक्ति का जुनून अलग ही होता है, किसी भी हालात में कोई भी अड़चन देश भक्ति से दूर नहीं होने देती। इसी का परिणाम है कि तंगदस्ती के चलते भी वह चाहे स्वतंत्रता दिवस हो या फिर गणतंत्र दिवस लेकिन तिरंगे की शान बरकरार रखने और उसे अधिक से अधिक लोगोें के सीने पर लगाकर तिरंगे को सलामी देने और उसे सीने से लगाए रखने को मजबूूर कर देता है। इस जुनून को देख राह चलते एवं तिरंगा पाने वाले लोग इस शख्सियत की भी चर्चा करने को मजबूर होते हैं। 15 अगस्त का पावन पर्व हो या फिर 26 जनवरी को गणतंत्र का त्यौहार होलीगेट के निकट चाय की ढकेल लगाने वाले रमेश लोगों को धातु का एक छोटा सा तिरंगा भेंट करते हुए वह अपने हाथ से लोगों की शर्ट, टी-शर्ट या जाॅकिट पर पिन से तिरंगा लगाकर उसे सैल्यूट मारते हैं। उनकी यह अनुपम भेंट किसी व्यक्ति विशेष या धनाढ्य लोगों के लिए ही नहीं आम राह चलते लोगों को भी तिरंगा भेंट कर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। इस देश भक्ति के जब्बे के साथ ही रमेश मजबूर और मजलूमों को मुफ्त में चाय पिलाने में भी कोताही नहीं बरतता। जबकि रमेश की माली हालत भी अच्छी नहीं है। इसके बावजूद इतनी दया भावना को देख और सुनकर लोग रमेश के मुरीद बन जाते हैं।
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