इतिहास हमें सिखाता है कि महामारियां यथास्थिति को तोड़ने के लिए जबरदस्त अवसर प्रदान कर सकती हैं। कोरोना वायरस ने यह चीख-चीखकर बता दिया है कि हमारा जीने का तरीका न सिर्फ हमारे लिए बल्कि इस ग्रह के लिए कितना भंगुर और विनाशकारी है। हमें न सिर्फ अपना जीने का तरीका बदलना होगा बल्कि उन मूल्यों को भी बदलना होगा जो आज इस हालात के लिए जिम्मेदार है। हमें कोशिश करनी होगी कि विकास का अर्थ सिर्फ पैसा ही न हो, उसमें स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य जीवों की उन्नति भी शामिल हो। हमें स्थायी भविष्य की ओर बढ़ना होगा। चंद लोगों की तरक्की के लिए समूची मानव सभ्यता को दांव पर नहीं लगाया जा सकता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

Related Items
सिलिकॉन की दुनिया में भारत की दस्तक…
दुनिया के भुगतान परिदृश्य में यूपीआई से आया बड़ा बदलाव
‘स्व-प्रकाशन’ ने बदल दी है किताबों की दुनिया...