भारत में प्रौद्योगिकी का भविष्य एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार ‘एआई का लोकतंत्रीकरण’ द्वारा संचालित है। भारत का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कुछ कंपनियों, संस्थानों या देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय, इसे इस तरह विकसित और उपयोग किया जाना चाहिए कि हर नागरिक को लाभ मिले, सार्वजनिक कल्याण और सामूहिक भलाई का समर्थन हो। मानवता के लिए एआई का यह विज़न प्रौद्योगिकीगत प्रगति में लोगों को केंद्र में रखता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार समाज की सेवा करे, न कि इसके विपरीत।
इस विज़न को साकार करने के लिए आवश्यक है कि एआई बड़े पैमाने पर विश्वसनीय रूप से काम करे और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, वित्त और सार्वजनिक सेवाओं सहित दैनिक जीवन में सहजता से एकीकृत हो। इस प्रकार के जनसंख्या-स्तरीय प्रभाव को एक मजबूत और एकीकृत एआई स्टैक के माध्यम से संभव बनाया जा सकता है, जो एआई एप्लीकेशन को प्रभावी ढंग से बनाने, तैनात करने और संचालित करने के लिए आवश्यक उपकरणों, प्रणालियों और अवसंरचना को एक साथ लेकर आता है। इसके लिए भारत लगातार ‘इंडिया एआई स्टैक’ पर काम कर रहा है।
अंग्रेजी में पढ़ें : India is 'democratising' Artificial Intelligence...
एआई स्टैक उपकरणों और प्रणालियों का वह संपूर्ण सेट है जो एआई एप्लीकेशंस को तैयार करने और चलाने के लिए एक साथ मिलकर काम करता है। ये ‘सिरी और एलेक्सा’ जैसे वर्चुअल असिस्टेंट एप्लीकेशन रोजमर्रा के उपकरणों और नेटफ्लिक्स व स्पॉटिफ़ाई जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत सिफारिशों से लेकर, रोग निदान, वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान, तथा परिवहन में उपयोग किए जाने वाले उन्नत सिस्टम तक फैले होते हैं। एआई स्टैक हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर और प्लेटफॉर्म को एक साथ लाता है, जो डेटा संग्रह, एआई मॉडल का प्रशिक्षण, और वास्तविक जीवन में उनके उपयोग में मदद करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि एआई शुरुआत से अंत तक सुचारू रूप से काम करे।
एआई स्टैक पांच परतों, यानी लेयर, से बना है, जिनमें से प्रत्येक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एआई स्टैक वास्तविक दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को काम करने योग्य बनाता है, चाहे वह लोगों द्वारा रोजमर्रा में उपयोग किए जाने वाले ऐप्स हों या डेटा, कंप्यूटिंग पॉवर, नेटवर्क और ऊर्जा जो पर्दे के पीछे काम करते हैं। ये सभी परतें मिलकर सुनिश्चित करती हैं कि एआई समाधान बड़े पैमाने पर काम करने योग्य, विश्वसनीय और जनसंख्या-स्तरीय प्रभाव प्रदान करने में सक्षम हों।
एप्लिकेशन लेयर एआई स्टैक के यूज़र-फेसिंग कंपोनेंट को दर्शाती है। इसमें रोग निदान उपकरण, कृषि परामर्श प्लेटफ़ॉर्म, चैटबॉट्स और भाषा अनुवाद एप्लीकेशन जैसी एआई-संचालित ऐप्स और सेवाएं शामिल हैं। यह लेयर जटिल एआई प्रक्रियाओं को सरल, उपयोगकर्ता-अनुकूल सेवाओं में बदलती है, जिन्हें लोग आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
भारतीय स्टार्टअप स्थानीय भाषाओं, संदर्भों और क्षेत्र-विशेष आवश्यकताओं के अनुसार एआई एप्लीकेशन विकसित कर रहे हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में इसे अपनाने की प्रक्रिया तेज हो रही है। कृषि में, एआई-संचालित परामर्श उपकरण बुआई के निर्णय, फसल की पैदावार और इनपुट दक्षता को सुधार रहे हैं, और आंध्र प्रदेश तथा महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्य स्तर पर लागू मामलों में उत्पादकता में 30–50 फीसदी तक की वृद्धि देखी गई है।
स्वास्थ्य सेवा में, एआई एप्लीकेशन क्षय रोग, कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकार और अन्य स्थितियों का जल्दी पता लगाने में सक्षम बना रहे हैं, जिससे रोकथाम और निदान मजबूत हो रहे हैं। शिक्षा में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एआई लर्निंग को सीबीएसई पाठ्यक्रम, दीक्षा प्लेटफ़ॉर्म और युवा एआई जैसी पहलों के माध्यम से शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक एआई कौशल प्राप्त होते हैं।
न्याय प्रदायगी में, ई-कोर्ट्स फेज़ III अनुवाद, केस प्रबंधन, शेड्यूलिंग और सिटिज़न-फेसिंग सेवाओं के लिए एआई और एमएल का उपयोग करता है, स्थानीय भाषाओं में पहुंच के माध्यम से दक्षता और पारदर्शिता में सुधार करता है।
मौसम और आपदा प्रबंधन में, भारतीय मौसम विभाग वर्षा, चक्रवात, धुंध, बिजली गिरने और आगजनी के उन्नत पूर्वानुमान के लिए एआई का उपयोग करता है, और मौसम जीपीटी जैसे उपकरण किसानों और आपदा प्रतिक्रिया को समर्थन प्रदान करते हैं।
एप्लीकेशन लेयर वह स्थान है जहां एआई उन्नत क्षमताओं को सुलभ और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाओं में बदलकर वास्तविक मूल्य प्रदान करता है। जब इसे प्राथमिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लागू किया जाता है, तो यह एआई को केवल प्रयोगात्मक स्तर से आगे बढ़ाकर रोजमर्रा के निर्णय लेने और सेवाओं की प्रदायगी में सक्षम बनाता है। यही व्यापक स्तर पर अपनाए जाने की प्रक्रिया अंततः एआई के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को निर्धारित करती है।
एआई तब परिवर्तनकारी प्रभाव प्रदान करता है जब इसकी एप्लीकेशन बड़े पैमाने पर अपनाई जाती हैं, काफ़ी कुछ इंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकियों की तरह। एआई एप्लीकेशन का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण, परिवहन, शासन और जलवायु कार्रवाई जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी बढ़ता जा रहा है। भारत एक ‘एआई प्रसार’ रणनीति अपना रहा है, जो जनसंख्या स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में एआई का उपयोग करती है।
पूरे देश में, एआई-सक्षम एप्लीकेशन किसानों को सूचित निर्णय लेने में मदद कर रही हैं, चिकित्सकों को जल्द निदान में समर्थन प्रदान कर रही हैं, और सार्वजनिक सेवा प्रदायगी की दक्षता बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, वास्तविक दुनिया में उपयोग के मामलों और बड़े पैमाने पर अपनाए जाने को प्राथमिकता देकर, एप्लीकेशन लेयर सुनिश्चित करती है कि एआई ठोस लाभ प्रदान करे और नागरिकों के जीवन में प्रत्यक्ष सुधार लाए।
एआई मॉडल लेयर, एआई सिस्टम के मस्तिष्क का काम करता है। एआई मॉडल डेटा पर प्रशिक्षित किए जाते हैं जिससे वे पैटर्न पहचान सकें, पूर्वानुमान लगा कर सकें और निर्णय ले सकें। उदाहरण के लिए, ये मॉडल एक्स-रे से रोगों का पता लगाने, फसल उपज का पूर्वानुमान लगाने, भाषाओं का अनुवाद करने, या चैटबॉट के माध्यम से प्रश्नों का उत्तर देने में मदद करते हैं। ये मॉडल एप्लीकेशन को बुद्धिमत्ता प्रदान करते हैं, जिससे वे उपयोगकर्ताओं को अर्थपूर्ण एआई-सक्षम परिणाम दे सकें।
भारतीय स्टार्टअप फुल-स्टैक और क्षेत्र-विशिष्ट एआई मॉडल विकसित कर रहे हैं, जो भारतीय भाषाओं, स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं और सार्वजनिक सेवा प्रदायगी के अनुरूप हैं। उदाहरण के लिए; सर्वम् एआई भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा और स्पीच मॉडल विकसित कर रहा है, जिससे वॉइस इंटरफेस, दस्तावेज़ प्रसंस्करण और नागरिक सेवाओं को समर्थन दिया जा सके। भाषिणी, राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के तहत, में 350+ एआई मॉडल हैं, जिनमें स्पीच रिकग्निशन, मशीन ट्रांसलेशन, टेक्स्ट-टु-स्पीच, ओसीआर और भाषा पहचान शामिल हैं, जिससे डिजिटल सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच मजबूत होती है।
एआई मॉडल लेयर वह कोर इंटेलिजेंस है जो यह तय करती है कि एप्लीकेशन वास्तविक दुनिया की जरूरतों को कितने प्रभावी ढंग से समझ सकती हैं, पूर्वानुमान लगा सकती हैं और प्रतिक्रिया दे सकती हैं। संप्रभु, भारत-केंद्रित मॉडल और साझा संग्रह विकसित करके, यह लेयर सुनिश्चित करती है कि एआई क्षमताएं प्रासंगिक, विश्वसनीय और स्थानीय भाषाओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप हों। इस आधार को मजबूत करना स्केलेबल नवाचार को सक्षम बनाता है और बाहरी मॉडल इकोसिस्टम पर निर्भरता को कम करता है।
एआई मॉडलों में प्रारंभिक प्रगति कुछ टैक्नॉलॉजी लीडर द्वारा संचालित थी, जिनके पास बड़े पैमाने पर कम्प्यूटिंग संसाधनों की पहुंच थी, लेकिन ओपन-सोर्स मॉडलों के उदय ने प्रवेश बाधाओं को कम किया, लागत घटाई, पारदर्शिता में सुधार किया और भाषाओं तथा संदर्भों में स्थानीयकरण को सक्षम बनाया। इस बदलाव का लाभ उठाते हुए, भारत एक संप्रभु, समावेशी और एप्लीकेशन-केंद्रित एआई मॉडल इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जो विशेष रूप से सार्वजनिक सेवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि और शासन में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जनसंख्या स्तर की जरूरतों पर केंद्रित है और इसे स्थानीय भाषाओं, नियामक ढांचों और सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप ढालते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है और इसे विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया में उपयोगी बनाता है।
कम्प्यूट लेयर, एआई की मांसपेशी, एआई मॉडलों को प्रशिक्षित और चलाने के लिए आवश्यक कम्प्यूटिंग शक्ति प्रदान करती है। प्रशिक्षण के दौरान, कम्प्यूट बड़ी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करता है जिससे मॉडल सीख सके और सुधार कर सके। आज यह शक्ति उन्नत प्रोसेसिंग चिप्स जैसे एनवीआईडीआईए की ब्लैकवेल ग्राफिक्स प्रोसैसिंग यूनिट, गूगल की टेंसर प्रोसैसिंग यूनिट और न्यूरल प्रोसैसिंग यूनिट से आती है, जो एआई सिस्टम को कुशलता और बड़े पैमाने पर संचालन करने में सक्षम बनाती हैं।
संप्रभु और रणनीतिक एआई एप्लीकेशंस के लिए 3,000 अगली पीढ़ी के जीपीयू के साथ एक सुरक्षित राष्ट्रीय जीपीयू क्लस्टर स्थापित किया जा रहा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ, 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दे चुका है, जिनमें चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। देशज चिप डिज़ाइन पहलें जैसे शक्ति और वेगा प्रोसेसर एआई हार्डवेयर में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। भारत कस्टम एआई चिप्स भी विकसित कर रहा है और अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है, जिसमें फैब्स और एटीएमपी यूनिट्स सहित, 10 स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएं शामिल हैं।
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन ने आईआईटी, आईआईएसईआर और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों में 40 पेटाफ्लॉप्स से अधिक की कम्प्यूटिंग क्षमता तैनात की है। परम सिद्धि-एआई और ऐरावत जैसी प्रमुख प्रणालियां प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मौसम पूर्वानुमान और औषधि खोज सहित विभिन्न एप्लीकेशन के लिए एआई-अनुकूलित सुपरकम्प्यूटिंग प्रदान करती हैं।
कम्प्यूट लेयर वह महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता है, जो एआई नवाचार के पैमाने, गति और परिष्कृत स्तर को निर्धारित करता है। उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग तक साझा और किफायती पहुंच का विस्तार करने के साथ-साथ घरेलू चिप और सुपरकम्प्यूटिंग क्षमताओं को मजबूत करके, भारत एआई विकास में संरचनात्मक बाधाओं को कम कर रहा है। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि कम्प्यूट शक्ति कुछ गिने-चुने हाथों में सिमटने के बजाय अनुसंधान, स्टार्टअप और सार्वजनिक संस्थानों में व्यापक नवाचार का समर्थन करे।
उच्च-स्तरीय एआई कम्प्यूट तक पहुंच मुख्यतः अधिक लागत और उन्नत हार्डवेयर की कुछ तकनीकी कंपनियों और देशों में केंद्रीकरण के कारण सीमित रही है, जिससे छोटे खिलाड़ियों की भागीदारी बाधित हुई है। इसके विपरीत, भारत इंडिया एआई मिशन के तहत सरकार-समर्थित क्लाउड अवसंरचना के माध्यम से किफायती और साझा कम्प्यूट पहुंच का विस्तार कर रहा है। इंडिया एआई कम्प्यूट पोर्टल 38,000 से अधिक जीपीयू और 1,050 टीपीयू तक पहुँच ₹100 प्रति घंटे से कम की सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराता है, जबकि वैश्विक दरें ₹200 प्रति घंटे से अधिक हैं।
क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय मिशनों और सार्वजनिक अवसंरचना को घरेलू चिप डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और सुपरकम्प्यूटिंग क्षमताओं के विकास के प्रयासों के साथ जोड़कर, भारत प्रवेश बाधाओं को कम कर रहा है, दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है, और यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई नवाचार कम्प्यूट उपलब्धता की सीमाओं से बंधे बिना विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विस्तार कर सके।
डेटा सेंटर और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर एआई के लिए घर और राजमार्ग का काम करती है। डेटा सेंटर वे स्थान हैं जहां एआई प्रणालियां संग्रहीत की जाती हैं और संचालित होती हैं, जबकि इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और 5जी जैसे नेटवर्क उपयोगकर्ताओं, कंप्यूटरों और एआई मॉडलों के बीच डेटा का आदान-प्रदान करते हैं। ये साथ मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि एआई विश्वसनीय रूप से, तेज़ी से काम करे और जहां भी उपयोगकर्ता हों वहां तक पहुंचे। मज़बूत नेटवर्क और डेटा सेंटर के बिना, एआई एप्लीकेशन प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकेंगी और न ही बड़े पैमाने पर विस्तार कर सकेंगी।
भारत में डेटा सेंटर और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर एक राष्ट्रव्यापी ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क क्लाउड और एआई सेवाओं के लिए उच्च-गति डेटा संचरण को समर्थन देता है। देश के सभी राज्यों में 5जी सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं और ये 85 फीसदी जनसंख्या को कवर करते हुए, देश के 99.9 फीसदी जिलों में उपलब्ध हैं।
भारत वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता का लगभग तीन फीसदी हिस्सा रखता है, जिसकी संस्थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 960 मेगावॉट की है। इसके अलावा, एआई और क्लाउड कार्यभार में वृद्धि के कारण 2030 तक यह क्षमता तेजी से बढ़कर 9.2 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।
मुंबई–नवी मुंबई भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब है, जो देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता का 25 फीसदी से अधिक हिस्सा रखता है। अन्य प्रमुख डेटा सेंटर हब में बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर, पुणे और कोलकाता शामिल हैं।
वैश्विक टैक दिग्गज एआई और डिजिटल अवसंरचना को गति देने के लिए भारत में निवेश कर रहे हैं, जो देश के प्रौद्योगिकीय परिदृश्य के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। प्रमुख प्रतिबद्धताओं में डेटा सेंटर और एआई प्रशिक्षण के लिए माइक्रोसॉफ्ट का ₹1.5 लाख करोड़, 2030 तक क्लाउड अवसंरचना और एआई-आधारित डिजिटलीकरण के लिए अमेज़न का ₹2.9 लाख करोड़, तथा विशाखापत्तनम में एक गीगावॉट एआई हब के लिए गूगल का ₹1.25 लाख करोड़ का निवेश शामिल है।
डेटा सेंटर और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर वह आधारभूत रीढ़ प्रदान करती है, जो एआई प्रणालियों को बड़े पैमाने पर और रिअल टाइम में संचालन करने में सक्षम बनाती है। कनेक्टिविटी को मजबूत करने और घरेलू डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार करके, भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि एआई सेवाएं विश्वसनीय, त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली और व्यापक रूप से सुलभ बनी रहें। यह एकीकृत दृष्टिकोण विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षित और स्केलेबल एआई परिनियोजन का समर्थन करता है, साथ ही डिजिटल क्षमताओं को राष्ट्रीय इकोसिस्टम के भीतर सुदृढ़ रूप से स्थापित करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर एआई परिनियोजन की रीढ़ है, जिसमें प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां उच्च-क्षमता वाले डेटा सेंटर और उच्च-गति नेटवर्क में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। भारत डिजिटल कनेक्टिविटी और घरेलू डेटा सेंटर अवसंरचना के व्यापक विकास के माध्यम से इस आधार को सुदृढ़ कर रहा है। वैश्विक और भारतीय, दोनों ही प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा किए गए निवेश यह सुनिश्चित करने में सहायक हैं कि एआई मॉडल, डेटा और नवाचार इकोसिस्टम देश के भीतर ही होस्ट किए जाएं। कनेक्टिविटी में सुधार, डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार और डिजिटल अवसंरचना को राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर बनाए रखकर, भारत विभिन्न क्षेत्रों में एआई अपनाने के लिए एक लचीला और स्केलेबल वातावरण तैयार कर रहा है।
एनर्जी लेयर पूरे एआई स्टैक को संचालित रखती है। एआई डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में विद्युत ऊर्जा की खपत करते हैं, क्योंकि एआई प्रणालियों को प्रशिक्षित करने और संचालित करने के लिए शक्तिशाली कंप्यूटरों की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी के अधिक कुशल होने के बावजूद, एआई को अभी भी स्थिर और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता रहती है। इसलिए, एआई अवसंरचना के सतत् विकास को समर्थन देने के लिए स्वच्छ और किफायती ऊर्जा अत्यंत आवश्यक है।
भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 242.49 गीगावॉट की रिकॉर्ड अधिकतम विद्युत मांग पूरी की, और राष्ट्रीय ऊर्जा कमी को घटाकर मात्र 0.03 फीसदी कर दिया, जिससे एआई डेटा सेंटरों और उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग सुविधाओं के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हुई। कुल संस्थापित विद्युत क्षमता 509.7 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो ऊर्जा-गहन एआई कार्यभार को समर्थन देने के लिए आवश्यक पैमाना प्रदान करती है।
गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 256.09 गीगावॉट है, जो कुल संस्थापित क्षमता का 51 फीसदी से अधिक है, और यह एआई अवसंरचना के विकास को निरन्तरता के साथ संरेखित करते हुए डेटा सेंटर के कार्बन फुटप्रिंट को कम करती है।
भारत 2031–32 तक 57 गीगावॉट के पम्प्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और 43,220 मेगावॉट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को हासिल करने की योजना बना रहा है। इससे ग्रिड की स्थिरता और अधिक सुदृढ़ होगी तथा परिवर्तनीय अक्षय ऊर्जा के साथ संचालित एआई डेटा सेंटर को समर्थन मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, भारत के बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत् दोहन और विकास विधेयक एआई और डेटा सेंटरों के लिए परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ, स्थिर और चौबीसों घंटे उपलब्ध ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित करता है। यह विधेयक निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाता है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों तथा माइक्रो-रिएक्टरों की तैनाती को तेज़ करता है।
एनर्जी लेयर पूरे एआई इकोसिस्टम की विश्वसनीयता और निरन्तरता की आधारशिला है। पर्याप्त, किफायती और लगातार अधिक स्वच्छ विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करके, भारत ऊर्जा-गहन एआई अवसंरचना को ग्रिड की स्थिरता से समझौता किए बिना बड़े पैमाने पर विस्तार करने में सक्षम बना रहा है। एक लचीले और कम-कार्बन ऊर्जा मिश्रण की ओर यह बदलाव दीर्घकालिक एआई विकास को समर्थन देता है और प्रौद्योगिकीय प्रगति को राष्ट्रीय जलवायु तथा सततता लक्ष्यों के साथ संरेखित करता है।
एआई और डेटा सेंटर का तीव्र विस्तार वैश्विक स्तर पर बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है। अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर की विद्युत खपत दोगुने से भी अधिक हो जाएगी और एआई-प्रेरित कार्यभार के तेजी से बढ़ने के साथ यह लगभग 945 टेरावॉट-घंटे प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। भारत में यह रुझान ऐसे समय में सामने आ रहे हैं जब विद्युत क्षेत्र एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 500 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से अधिक है, जो 2030 के लक्ष्य से पहले एक महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा उपलब्धि है। स्वच्छ, किफायती और सुरक्षित ऊर्जा का यह विस्तार विद्युत प्रणाली की उस क्षमता को सुदृढ़ करता है जो ऊर्जा-गहन और निरंतर संचालित एआई तथा डेटा सेंटर कार्यभार का समर्थन कर सके, और इस प्रकार एआई अवसंरचना के विकास को स्थायी और लचीली ऊर्जा आपूर्ति के साथ संरेखित करता है।
कुल मिलाकर, एप्लीकेशन, एआई मॉडल, कम्प्यूट, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा सहित प्रत्येक लेयर को मजबूत करके, भारत एआई के लोकतंत्रीकरण को सक्षम बना रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि इसके लाभ जनसंख्या स्तर पर नागरिकों तक पहुंचें। कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, न्याय और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया के उपयोग पर दिया जा रहा जोर यह दर्शाता है कि एआई किस प्रकार, समावेशी, संप्रभु और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बना रह कर भी, सेवा प्रदायगी, उत्पादकता और सार्वजनिक कल्याण में प्रत्यक्ष सुधार कर सकता है।






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