एक ऐतिहासिक थाती के रूप में सामाजिक व सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने वाला मार्गशीर्ष पूर्णिमा को आयोजित ‘श्री बल्देव जी की गद्दल पूनौ’ का मेला अपने आप में अनोखा है। ‘गद्दल’ का अर्थ होता है रजाई। परम्परानुसार, इस आयोजन में शीत ऋतु के चलते एक विशाल मूर्ति को विशिष्ट परिधान के रूप में श्री ठाकुर जी को विशेष प्रकार की रजाई ओढ़ाई जाती है। ब्रज मंडल में ख्यातिलब्ध यह मेला करीब एक माह तक चलने वाला एकमात्र पर्व है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...






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