इस बार का भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आयोजन कई क्षेत्रों में समावेशिता और विविधता का एक प्रेरक प्रतीक बनकर उभरा। इफ्फी आयोजन देश एवं दुनिया के कोने-कोने से कला और कलाकारों को एकत्रित कर विषयवस्तु को सभी उपभोक्ताओं के लिए सुलभ बनाने में सफल रहा। क्षेत्रीय सिनेमा से लेकर विदेशी भाषा की फिल्मों तक, इफ्फी सिनेमाई उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करने वाले सामंजस्यपूर्ण ताने-बाने में सब कुछ का समावेश करता दिखा।
इस बार महोत्सव के सभी स्थलों पर दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं के सोचे-समझे समन्वय के जरिए समावेशिता की दिशा में एक अनुकरणीय प्रगति देखी गई। संबद्ध ऑडियो विवरण और सांकेतिक भाषा प्रावधानों से सुसज्जित दिव्यांगजन प्रतिनिधियों के लिए तैयार की गई चार विशेष स्क्रीनिंग, सभी के लिए सिनेमाई अनुभव सुनिश्चित करने के प्रति इफ्फी के समर्पण को दर्शाती है।
इस बार यह महोत्सव 40 उल्लेखनीय महिला फिल्मकारों के सिनेमाई कौशल को रेखांकित करके लैंगिक समानता का समर्थन करता भी दिखा। इन महिला फिल्मकारों का योगदान न केवल सिनेमाई परिदृश्य को समृद्ध करता है, बल्कि फिल्म उद्योग के अंदर समानता और प्रतिनिधित्व की मांग को भी मुखर करता है।
इफ्फी की एक पहचान पूरे भारत में फैली विविध संस्कृतियों व कथाओं को नमन करने वाले क्षेत्रीय सिनेमा का भी उत्सव रहा। पूर्वी भारत की बंगाली, उड़िया, असमिया, मणिपुरी और उत्तर-पूर्वी बोलियों की जीवंत फिल्मों से लेकर तमिल, मलयालम, पंजाबी, डोगरी, भोजपुरी, राजस्थानी, उर्दू, छत्तीसगढ़ी, कोंकणी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ और तेलुगू सिनेमा की चमक तक, 54वां इफ्फी समारोह में भारत की सांस्कृतिक विविधता की एक मनोरम यात्रा का प्रदर्शन दिखा।
समकालीन रुझान का समावेश करते हुए इस बार सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज पुरस्कार की शुरुआत डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से कहानी कहने के उभरते परिदृश्य को इफ्फी द्वारा मान्यता प्रदान करना दर्शाता है। 15 ओटीटी प्लेटफार्मों से 10 भाषाओं की प्रविष्टियों के साथ, यह पुरस्कार न केवल उत्कृष्ट कंटेंट को मान्यता प्रदान करता है बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति की विविधता को भी बढ़ावा देता हुआ दिखता है।
‘सभी के लिए मनोरंजन’ के अपने आदर्श वाक्य और ‘विविधता में एकता’ के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, यह महोत्सव अधिक समावेशी और जीवंत सिनेमाई दुनिया का मार्ग प्रशस्त करता हुआ महसूस हुआ।






Related Items
कल के सितारों ने बनाई थी भारतीय सिनेमा की रूह
भारतीय रेलवे प्लेटफार्मों पर स्थानीय विरासत के दमदार दर्शन
यूरोपीय संघ में 99 फीसदी से अधिक भारतीय निर्यात के लिए खुले दरवाजे