जोश और बलिदान से तराशी गई फिल्म है ‘काकोरी’


निर्देशक कमलेश के मिश्रा की नई फिल्म, 'काकोरी' साल 1925 के महान 'काकोरी रेल एक्शन' को समर्पित एक शताब्दी श्रद्धांजलि है। यह एक ऐसा साहसिक कार्य था जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गति और दिशा को बदल कर रख दिया था।

कमलेश कहते हैं, "यह जोश और बलिदान से तराशी गई फिल्म है। 48 घंटों के भीतर चार क्रांतिकारियों का शहीद हो जाना, क्या ऐसी घटना कभी फीकी पड़ सकती है? उनकी बहादुरी और कुर्बानी की गूंज आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई देती है।"

Read in English: ‘Kakori’: A century-old revolution returns to the spotlight…

फिल्म की विषयवस्तु पर गहन शोध किया गया है। घटना के वास्तविक सार को पकड़ने के लिए पुरानी पुस्तकों और पुराने अखबारों को खंगालने से लेकर नामी इतिहासकारों से परामर्श करने और शाहजहांपुर जैसे स्थानों पर बने महत्वपूर्ण स्मारकों का दौरा करने तक, हर पहलू पर अथक समर्पण के साथ काम फिल्म में नजर आता है।

यह फिल्म भारत में 1920 के दशक की घटनाओं को ब्रिटिश अराजकता की पृष्ठभूमि में दिखाती है। यह काकोरी में हुई ऐतिहासिक रेल एक्शन की शताब्दी को चिह्नित करती है, जिसे उस समय के औपनिवेशिक शासन को चुनौती देने वाले निडर क्रांतिकारियों ने अंजाम दिया था।

इस फिल्म की कहानी हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, चंद्रशेखर आज़ाद और उनके साथियों के नेतृत्व में रेलवे में एक साहसी ट्रेन डकैती के माध्यम से ब्रिटिश खजाने को लूटने के प्लान के पहलुओं के इर्द-गिर्द घूमती है।

यह घटना भारत की आज़ादी की लड़ाई में एक अहम पल था। फिल्म इस घटना के मौके पर क्रांतिकारियों के आदर्शों, उनके आपसी सौहार्द और अमर बलिदान को दिखाती है। धोखे, जेल और शहादत के जरिए काकोरी युवा साहस और अटूट देशभक्ति की एक दिल को छू लेने वाली कहानी का रोमांचक चित्रण है।

कलाकार और क्रू

निर्देशक : कमलेश के मिश्रा

निर्माता : केएसआर ब्रदर्स

पटकथा : कमलेश के मिश्रा

सिनेमैटोग्राफर : देव अग्रवाल

संपादक : अभिषेक वत्स, एरोन राम

संगीत : बापी भट्टाचार्य

कलाकार : पीयूष सुहाने, मानवेंद्र त्रिपाठी, विकास श्रीवास्तव, संतोष कुमार ओझा, रजनीश कौशिक व हृदयजीत सिंह



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