विभिन्न चित्रकला शैलियों पर भगवान श्रीकृष्ण का प्रभाव


रंगों और रेखाओं के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के रूप का चित्रण इस देश की परम साधना रही है। इन चित्रों को यदि हम रेखाबद्ध काव्य या खंड काव्य कहें तो अत्युक्ति नहीं होगी। जैसे, काव्य शब्दबद्ध चित्र है, ठीक वैसे ही एक चित्र रेखाबद्ध काव्य होता है।

चित्र साधना का आश्रय लेकर साधकों ने अपने आराध्य राधा और कृष्ण के कई मोहक चित्र बनाए हैं, जिनसे मन का सहज लगाव भगवान श्रीकृष्ण के प्रति हो जाता है। इन चित्रों में उनकी विभिन्न लीलाओं का उत्कृष्ट चित्रण किया गया है। उपनिषद् काल से गुप्तकाल तक की चित्रकला में श्रीकृष्ण का पूरा प्रभाव है। दीवारों व काष्ठ फलकों पर श्रीकृष्ण के चित्र भरपूर मात्रा में मिलते है।

भारत में मुगल शासन स्थापित होते ही चित्रकला पर फारस का प्रभाव पड़ा और कागज पर चित्रांकन का प्रचुर प्रसार हुआ। अकबर के दरबारी चित्रकारों ने महाभारत को भी चित्रित किया जिसके नायक श्रीकृष्ण थे। इस युग में काष्ठ, दीवार और हाथीदांत की जगह कागज ने ले ली। इसी काल में राजस्थानी शैली का चित्रांकन भी हुआ। हालांकि, अंग्रेजी शासन में चित्रकला की भयंकर अधोगति हुई, लेकिन कला गुरु अवनीन्द्र नाथ ठाकुर ने इस दौरान पूरे भारत का भ्रमण किया और चित्रकला में पुनः कृष्ण लीलाओं को अतिपरिष्कृत रूप से जोड़ा।

चित्रकला को प्रबल प्रोत्साहन देने वाली भावना धर्म की रही है। कृष्ण की पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक काव्यमय कथापरक लीलाओं से लेकर सूर, मीरा, तुलसी के पदों का आधार बनाकर अपनी तूलिका से राजस्थानी चित्र शैली में खूब चित्र बनाए गए। उधर, मुगल कला शैली में भी नायक और नायिका राधा व कृष्ण ही ज्यादा रहे। पहाड़ी चित्रशैली और कांगड़ा शैली के चित्रों में भी राधा और कृष्ण को चित्रित किया गया है।

भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक और अभूतपूर्व शैली गत उत्कर्ष है, जिसमें कृष्ण सम्बन्धी कई काव्यात्मक कलाकृतियां तैयार की गईं। इनके अलावा भी कई प्रतिभावान चित्रकारों ने राधा व कृष्ण के चित्रों के जरिए अलौकिक सौन्दर्य का प्रस्तुतिकरण किया है।



Related Items

  1. प्रकृति के शाश्वत रक्षक और यमुना के प्रियतम हैं श्रीकृष्ण

  1. भगवान शिव की महिमा और सावन का महीना...

  1. बिना बिल्वपत्र भगवान शिव की पूजा है अधूरी...




Mediabharti