यह सत्य है कि कोई भी राष्ट्र संरचनाओं से महान नहीं बनता है बल्कि त्याग, समर्पण और निष्ठा के साथ किए गए प्रयासों और कार्यों से ही एक राष्ट्र के सुदृढ़ भविष्य की निर्मिति होती है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी अपने बलिदान से स्वतंत्र भारत के महान लक्ष्य को प्राप्त किया और विश्व के सबसे प्राचीन राष्ट्र को गौरवशाली सिंहासन पर आरूढ़ कर दिया। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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