स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि जरूरत पड़ने पर बीमा कंपनी इलाज का खर्च कितनी आसानी से चुकाएगी। आकर्षक सुविधाओं, बड़े बीमा कवर और कम प्रीमियम के दावों के बीच सही पॉलिसी चुनना आसान काम नहीं होता है। बाजार में उपलब्ध तीन अग्रणी कंपनियां स्टार हेल्थ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और नीवा बुपा की योजनाएं अपनी अलग-अलग खूबियों के साथ आती हैं। लेकिन, इनमें से किसे चुनना चाहिए? इसका जवाब केवल प्रीमियम या बीमा कवर की रकम देखकर नहीं दिया जाना चाहिए। पॉलिसी की शर्तें, दावा निपटाने का रिकॉर्ड, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मिलने वाली सुविधाएं और भविष्य में बढ़ने वाला खर्च भी इस फैसले को प्रभावित करते हैं।
यहां हम इन तीनों कंपनियों की चुनी हुई योजनाओं की तुलना के लिए एक 40 वर्षीय व्यक्ति, उनकी 40 वर्षीय पत्नी और 11 साल की बेटी के लिए 10 लाख रुपये के पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा जरूरत को पैमाना मानकर चलेंगे। इसके लिए, हम स्टार हेल्थ के सुपर स्टार प्रेफर्ड, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के एलिवेट और नीवा बुपा के रिअश्योर 2.0 टाइटेनियम प्लस प्लान को विकल्प मानकर चलेंगे। तीनों योजनाओं की अवधि एक वर्ष मान लेते हैं। इस आधार पर, स्टार हेल्थ का सालाना प्रीमियम 23,096 रुपये, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का 19,932 रुपये और नीवा बुपा का 23,419 रुपये पड़ता है।
पहली नजर में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का एलिवेट सबसे कम प्रीमियम वाला विकल्प दिखाई देता है। स्टार हेल्थ और नीवा बुपा की तुलना में इसका सालाना खर्च क्रमशः 3,164 रुपये और 3,487 रुपये कम है। हालांकि, केवल कम प्रीमियम के आधार पर इसे चुनना उचित नहीं होगा। बीमा का वास्तविक महत्व उस समय सामने आता है, जब परिवार के किसी सदस्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़े। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पॉलिसी किन खर्चों को कवर करती है और किन परिस्थितियों में बीमा कंपनी भुगतान करने से इनकार कर सकती है।
इन तीनों योजनाओं में कुछ ऐसी सुविधाएं हैं, जो इन्हें एक-दूसरे से अलग करती हैं। स्टार हेल्थ के सुपर स्टार प्रेफर्ड में असीमित लॉयल्टी बोनस की सुविधा है। इसके तहत हर पॉलिसी वर्ष के अंत में मूल बीमा राशि के बराबर बोनस मिलता है। यह सुविधा पॉलिसी के लगातार नवीनीकरण पर निर्भर करती है। इसकी खास बात यह है कि बोनस पर अधिकतम सीमा नहीं है। इसके अलावा, पांच साल तक निर्धारित श्रेणियों में कोई दावा नहीं करने पर पहले वर्ष के मूल प्रीमियम की वापसी का भी प्रावधान है। हालांकि, इसके लिए तय शर्तें पूरी करनी होंगी।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का एलिवेट भी बोनस के मामले में पीछे नहीं है। इसमें हर वर्ष मूल बीमा राशि का 20 प्रतिशत गारंटीड संचयी बोनस मिलता है, जिसकी अधिकतम सीमा मूल बीमा राशि का 100 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पावर बूस्टर नाम का वैकल्पिक लाभ भी उपलब्ध है। इसे लेने पर हर दावा-मुक्त वर्ष में बीमा राशि के बराबर अतिरिक्त बोनस मिल सकता है। यह बोनस असीमित बार जमा हो सकता है। इस तरह, लगातार दावा न करने वाले पॉलिसीधारकों के लिए यह सुविधा भविष्य में बड़ा बीमा कवर तैयार करने में मदद कर सकती है।
नीवा बुपा की रिअश्योर 2.0 टाइटेनियम प्लस योजना में भी बोनस की व्यवस्था है। इसमें प्रत्येक दावा-मुक्त वर्ष के लिए बीमा राशि का अप्रयुक्त हिस्सा आगे जुड़ता रहता है। इस सुविधा के तहत कुल बीमा राशि मूल बीमा राशि की दस गुना तक पहुंच सकती है। हालांकि, बोनस की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि भविष्य में इलाज की लागत कितनी बढ़ती है और परिवार को कितने बड़े बीमा कवर की जरूरत पड़ती है।
अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा राशि के दोबारा उपलब्ध होने की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। कई बार एक ही पॉलिसी से वर्ष में परिवार के एक से अधिक सदस्यों को इलाज की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में मूल बीमा राशि का समाप्त हो जाना चिंता का विषय बन सकता है। स्टार हेल्थ द्वारा मूल बीमा राशि के 100 प्रतिशत तक असीमित बार कवर बहाल करने की सुविधा दी जाती है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में यह सुविधा रीसेट बेनिफिट के तहत उपलब्ध है, जिसमें बीमा राशि 100 प्रतिशत तक बहाल की जा सकती है। वहीं, नीवा बुपा की रिअश्योर प्लस सुविधा पहले दावे के बाद सक्रिय होती है और प्रत्येक दावे के बाद बीमा कवर को फिर से बहाल करने का प्रावधान करती है।
वार्ड के किराये की सीमा भी स्वास्थ्य बीमा चुनते समय विशेष ध्यान देने योग्य है। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान वार्ड के किराये की निर्धारित सीमा से अधिक खर्च होने पर बीमा कंपनी कुछ अन्य खर्चों में भी आनुपातिक कटौती कर सकती है। तुलनात्मक रूप से स्टार हेल्थ की योजना में सिंगल स्टैंडर्ड वातानुकूलित वार्ड की सीमा है। इसके मुकाबले आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और नीवा बुपा की योजनाओं में वार्ड के किराये पर कोई निर्धारित सीमा नहीं बताई गई है। इसलिए, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में वार्ड के चयन को लेकर इन दोनों योजनाओं में अधिक लचीलापन मिल सकता है।
दावा निपटाने का अनुपात भी तीनों कंपनियों की तुलना में एक महत्वपूर्ण पहलू है। स्टार हेल्थ का दावा निपटान अनुपात 99.21 प्रतिशत, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का 99.82 प्रतिशत और नीवा बुपा का 91.9 प्रतिशत है। इन आंकड़ों के आधार पर आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का अनुपात सबसे अधिक और नीवा बुपा का सबसे कम है। हालांकि, दावा निपटान अनुपात को अकेले किसी कंपनी की विश्वसनीयता का अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि आंकड़े किस अवधि के हैं, इनकी गणना किस आधार पर हुई है और दावों के भुगतान में कितनी कटौती की गई।
हाल ही प्रकाशित एक रिपोर्ट में अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच भुगतान, इलाज की लागत और कैशलेस दावों को लेकर जारी विवादों का उल्लेख किया गया है। कई मामलों में मरीजों को कैशलेस मंजूरी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में बीमा कंपनियों ने अस्पताल के बिल में कटौती की, जबकि अस्पतालों ने इन कटौतियों पर सवाल उठाए। इसका सीधा असर उन मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ा, जिन्होंने इलाज के खर्च से बचने के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदा था।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कैशलेस सुविधा होने के बावजूद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। कहीं बीमा कंपनी इलाज की जरूरत पर सवाल उठाती है तो कहीं अस्पताल के बिल में शामिल कुछ खर्चों को स्वीकार नहीं किया जाता है। दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य उपभोग्य वस्तुओं के खर्च को लेकर भी विवाद होते हैं। इसलिए, पॉलिसी खरीदते समय यह समझना जरूरी है कि कैशलेस सुविधा का मतलब हर परिस्थिति में बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के इलाज होना नहीं है।
अध्ययन की गई इन तीनों योजनाओं में अस्पताल में भर्ती होने से पहले और छुट्टी मिलने के बाद के खर्चों की कवरेज में भी अंतर दिखता है। स्टार हेल्थ और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की योजनाओं में अस्पताल में भर्ती होने से पहले के 90 दिन और छुट्टी के बाद के 180 दिन तक के निर्धारित खर्च शामिल हैं। नीवा बुपा में अस्पताल में भर्ती होने से पहले के 60 दिन और छुट्टी के बाद के 180 दिन तक के खर्च कवर किए गए हैं। लंबे इलाज या अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद लगातार दवाइयों और जांच की जरूरत पड़ने पर यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
तीनों योजनाओं में पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि भी ध्यान देने योग्य है। इनमें पहले से मौजूद बीमारियों के लिए सामान्य प्रतीक्षा अवधि 36 महीने है। कुछ निर्धारित बीमारियों और उपचारों के लिए यह अवधि 24 महीने है। इसलिए, जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उन्हें पॉलिसी खरीदने से पहले संबंधित बीमारी के लिए लागू शर्तों की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए। बीमारी की जानकारी छिपाने से भविष्य में दावा अस्वीकार होने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
इलाज के वैकल्पिक तरीकों और घरेलू उपचार की सुविधाओं में भी अंतर दिखाई देता है। स्टार हेल्थ की योजना में आयुष उपचार के लिए 15,000 रुपये तक का कवर दिया गया है, जबकि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और नीवा बुपा की योजनाओं में आयुष उपचार के लिए बीमा राशि तक कवरेज का उल्लेख है। घर पर इलाज की सुविधा तीनों योजनाओं में उपलब्ध है। इसके अलावा, अंगदाता के इलाज से जुड़े खर्च भी तीनों योजनाओं में शामिल हैं। हालांकि, इन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए संबंधित पॉलिसी की विस्तृत शर्तें देखना जरूरी है।
मातृत्व संबंधी सुविधाओं के मामले में भी तीनों योजनाएं एक जैसी नहीं हैं। स्टार हेल्थ और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में अतिरिक्त प्रीमियम देकर मातृत्व कवर लिया जा सकता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के प्रस्ताव में सामान्य प्रसव के लिए 25,000 रुपये और सिजेरियन प्रसव के लिए 40,000 रुपये की सीमा दी गई है। इस सुविधा के लिए दो साल की प्रतीक्षा अवधि भी है। दूसरी ओर, नीवा बुपा की प्रस्तावित योजना में मातृत्व कवर उपलब्ध नहीं है। हालांकि, 40 वर्ष के दंपती और 11 साल की बेटी वाले परिवार के लिए यह सुविधा कितनी महत्वपूर्ण है, इसका फैसला उनकी भविष्य की जरूरतों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
स्टार हेल्थ की योजना में कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी हैं। इनमें निर्धारित चिकित्सा उपकरणों के लिए पांच लाख रुपये तक का कवर और कुछ शर्तों के तहत विशेष चिकित्सा उपकरणों के किराये या खरीद का खर्च शामिल है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में भी निर्धारित चिकित्सा उपकरणों के लिए पांच लाख रुपये तक की सुविधा का उल्लेख है। इसके अलावा, इसमें डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के तहत स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सलाह तथा दूसरी चिकित्सकीय राय जैसी सुविधाएं दी गई हैं। नीवा बुपा की योजना में भी असीमित कवर बहाली और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं हैं। हालांकि, स्वास्थ्य जांच की सीमा और उपलब्ध सेवाओं को पॉलिसी के दस्तावेजों से सत्यापित करना चाहिए।
इन तीनों योजनाओं की तुलना से स्पष्ट है कि हर पॉलिसी की अपनी विशेषताएं और सीमाएं हैं। स्टार हेल्थ में अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाओं और असीमित लॉयल्टी बोनस का आकर्षण है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का प्रीमियम कम है और वार्ड के किराये पर सीमा नहीं है। इसके अलावा, इसके प्रस्ताव में दावा निपटान अनुपात भी अधिक दर्ज किया गया है। नीवा बुपा में असीमित कवर बहाली और कमरे के किराये पर कोई सीमा नहीं होने जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन प्रस्ताव में इसका प्रीमियम सबसे अधिक और दावा निपटान अनुपात सबसे कम है।
फिर भी, किसी एक योजना को हर परिवार के लिए बेहतर बताना उचित नहीं होगा। जिस परिवार के लिए कम प्रीमियम महत्वपूर्ण है, वह आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के विकल्प पर विचार कर सकता है। जिसे अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाओं और बोनस की व्यवस्था चाहिए, वह स्टार हेल्थ की शर्तों का अध्ययन कर सकता है। वहीं, नीवा बुपा की योजना उन लोगों के लिए विचारणीय हो सकती है, जो इसकी कवर बहाली और वार्ड के किराये से जुड़ी सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं। यहां हमें समय-समय पर इन कंपनियों पर मीडिया में उठने वाले सवालों पर भी नजर रखनी चाहिए।
अंतिम निर्णय लेने से पहले तीनों कंपनियों से नवीनतम प्रीमियम और पॉलिसी दस्तावेज प्राप्त करना जरूरी है। प्रस्ताव में दिए गए प्रीमियम अंतिम नहीं हैं और चिकित्सकीय इतिहास, पहले किए गए दावों तथा बीमा कंपनी की जांच के आधार पर इनमें बदलाव हो सकता है। इसके साथ ही, अपने पसंदीदा अस्पतालों के नेटवर्क, सह-भुगतान की शर्तों, इलाज से जुड़ी सीमाओं और उपभोग्य वस्तुओं के खर्च की जानकारी भी लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य बीमा का उद्देश्य केवल अस्पताल का बिल चुकाना नहीं है, बल्कि बीमारी के समय परिवार को आर्थिक अनिश्चितता से बचाना भी है। इसलिए, कम प्रीमियम या बड़े बीमा कवर के आकर्षण में आने के बजाय उन शर्तों को समझना अधिक जरूरी है, जो वास्तव में इलाज के समय काम आएंगी। सही पॉलिसी वही होगी, जिसकी सुविधाएं परिवार की जरूरतों के अनुरूप हों और जिसकी शर्तों को समझकर बीमा खरीदा गया हो।
अस्वीकरण : इस लेख में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और नीवा बुपा हेल्थ इंश्योरेंस की विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की तुलना उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और उनमें उल्लिखित जानकारियों के आधार पर की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को इन योजनाओं की प्रमुख विशेषताओं, प्रीमियम, बीमा राशि, प्रतीक्षा अवधि, अतिरिक्त लाभों और दावा निपटान से जुड़े पहलुओं की जानकारी देना है। लेख में दी गई प्रीमियम राशि और अन्य विवरण संबंधित कोटेशन के समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। बीमा कंपनी की शर्तों, पॉलिसीधारक की आयु, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, चिकित्सा इतिहास और अंडरराइटिंग के आधार पर प्रीमियम तथा कवरेज में बदलाव हो सकता है। इस लेख में उल्लिखित दावा निपटान अनुपात से संबंधित तुलना दस्तावेज में दिए गए आंकड़ों पर आधारित है। इन्हें किसी कंपनी के भविष्य के दावा निपटान की गारंटी या उसकी सेवा की गुणवत्ता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। दावा स्वीकृत होना, उसकी राशि और भुगतान की प्रक्रिया पॉलिसी की शर्तों, बीमारी की प्रकृति, अस्पताल के बिल, उपलब्ध चिकित्सा दस्तावेजों तथा बीमा कंपनी के नियमों पर निर्भर करती है। कैशलेस सुविधा की उपलब्धता भी संबंधित अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच लागू व्यवस्था तथा दावे की पात्रता पर निर्भर करती है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि कोई भी स्वास्थ्य बीमा योजना खरीदने से पहले उसका पूरा पॉलिसी दस्तावेज, बीमा राशि, उप-सीमाएं, सह-भुगतान, कटौतियां, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से संबंधित नियम, अपवाद और नवीनीकरण की शर्तें ध्यानपूर्वक पढ़ें। जरूरत पड़ने पर बीमा कंपनी या अधिकृत सलाहकार से लिखित रूप में स्पष्टीकरण प्राप्त करें। मीडियाभारती.इन पर यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे बीमा खरीदने या किसी विशेष कंपनी अथवा योजना को चुनने की व्यक्तिगत वित्तीय, कानूनी या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी योजना का चयन पाठक की व्यक्तिगत जरूरतों, स्वास्थ्य स्थिति, बजट और पॉलिसी की विस्तृत शर्तों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। इस लेख में किसी बीमा कंपनी या योजना का समर्थन अथवा विरोध करने का उद्देश्य नहीं है।

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