आबकारी विभाग की कृपा से ड्राई एरिया वृन्दावन में बिक रही है अवैध शराब

अधिकारी व सिपाही सब ले रहे माहवारी, स्थानीय लोगों ने लगायी डीएम से गुहार

वृन्दावन। करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र वृन्दावन में कहनें को तो मांस मदिरा से लेकर तमाम तरीके के प्रतिबन्ध लागू है और शासन द्वारा वृन्दावन की धार्मिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखतें हुए उसे वृन्दावन में मद्य व मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा रखा हैं। लेकिन वृन्दावन आज के परिदृश्य में उक्त सभी वस्तुओं की विख्यात मंडी बन चुका हैं। इसमें ऐसा नहीं है कि यह सब शासन प्रशासन के बिना संज्ञान के यह अवैध कारोबार हो रहा हो। बल्कि हकीकत जानों तो आप आश्चर्य में पड़ जायेगे क्योंकि सूत्रों के अनुसार वृन्दावन में जितनें भी अवैध शराब के कार्य हो रहें है उनमें प्रशासन से लेकर आबकारी विभाग के सिपाही तक पूर्ण रूप से संलिप्त है और यही कारण है कि वृन्दावन में उक्त अवैध धन्धें को करने वाले बेखौफ अवैध धन्धें को संचालित कर रहे हैं और उन्हें किसी का भी भय नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि वृन्दावन में अगर एक मात्र शराब गांजा, व चरस आदि की बिक्री को ही देखा जाये तो खुद एक शराब माफिया ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है कि वह उक्त कारोबार को करने के लिए एक मुश्त मोटी धनराशि प्रशासन से लेकर आवकारी व पुलिस के सिपाही तक बन्दरवांट करते हैं। जिसमें अगर अकेले आबकारी विभाग को ही ले लो तो प्रति शराब माफिया द्वारा आबकारी विभाग के मुख्य अधिकारी को 25 हजार, स्थानीय अधिकारी को 10 हजार, व प्रति सिपाही को एक एक हजार रूपये के हिसाब से देते है कुल मिलाकर आबकारी विभाग को ही 45 हजार रूपयें माह की धनराशि का बन्दरबाट किया जाता हैं। इस नजरिये से देखा जाये तो वृन्दावन में करीब दर्जन भर से अधिक शराब माफिया मोटे पैमाने पर कार्य कर रहे है और औसतन इनका आकंलन किया जाये तो आबकारी विभाग को इन से लगभग छह लाख रूपयें से भी अधिक की माहवारी मिलती है। अब सोचनेीय विषय यह है कि इतनी मोटी धनराशि को आखिर कोई अधिकारी कैसे नजर अन्दाज कर सकता हैं और यही कारण है कि वृन्दावन में यह शराब माफिया बे रोक टोक इस कार्य को अन्जाम दे रहे हैं। यही नहीं कई बार स्थानीय लोगों द्वारा इस अवैध धन्धें की शिकायत स्वयं आबकारी विभाग से लेकर प्रशासन के अधिकारियों तक की गई है लेकिन आबकारी अधिकारी उनको हर बार एक भरोसे की लोलीपाॅप देकर टरका देते हैं। वहीं प्रशासन के बड़ें अधिकारियों को स्थानीय पुलिस गुमराह कर वह भी अपनी जेबे भरने में लगी रहती हैं। अब स्थानीय लोगों को जनपद के ईमानदारी जिलाधिकारी से ही उम्मीद है कि वह वृन्दावन जैसे धार्मिक स्थल पर शराब और मांस की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगवायेगे और आबकारी विभाग में तैनात भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्व कार्यवाही करेगे।


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login






Mediabharti