गुम होती संवेदनशीलता : इतने ‘संवेदनहीन’ क्यों होते जा रहे हैं हम?

समाज में संवेदनहीनता लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पतालों में, पुलिस के थानों में, किसी सरकारी दफ्तर में या कहीं भी आप जाएं और संवेदनहीनता से दो-चार न हों, यह आज की भागमभाग भरी जिंदगी में संभव ही नहीं है। संवेदनहीनता के कई ऐसे ही पहलुओं पर बात करने के लिए आज हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी। आप भी इस बातचीत में भाग ले सकते हैं। इस विषय पर अपनी राय रखने और पूरा साक्षात्कार देखने के लिए अभी सब्सक्राइब करें...


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