इन लडकियों के हाथों का ऐसा हुनर देख हर कोई हैरान

नई दिल्ली। यदि आप से कहा जाए कि अपने दोनों हाथों से हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ लिखेे, तो आपका जवाब होगा ना। इस दुनिया में बहुत कम ही ऐसे लोग है जो यह कमाल कर सकते है। आज आपको एक ऐसे गांव के बारे में बता रहे है जहां एक नहीं दो नहीं बल्कि छह लडकियां में ऐसा हुनर है। ये लडकियों दोनों हाथों से एक साथ लिखती है जिन्हें देख हर कोई हैरान है। 

हरियाणा के उझाना गांव की ये छात्राए एक हाथ से हिंदी और दूसरे से अंग्रेजी लिखती है। दोनों हाथों की लिखावट बिल्कुल एक जैसी है। इतनी सुंदर कि देखने वाले भी पहचान नहीं पाते कि दाएं हाथ से लिखा है या बाएं से। बेटियों ने ऐसा साइंटिस्ट अलबर्ट आइंस्टीन से प्रेरित होकर सीखा है। वो भी सिर्फ छह माह में।

 

सभी बेटियां गांव के ही स्वामी विवेकानंद स्कूल में नौवीं क्लास की स्टूडेंट हैं। इनके नाम पूजा, प्रिया, तमन्ना, मोनिका, ईशा व मन्नू हैं। वे बताती हैं, करीब छह महीने पहले टीचर कुलदीप सिंह क्लास में साइंस पढ़ा रहे थे। इसी दौरान रिलेविटी के सिद्धांत टॉपिक पर अलबर्ट आइंस्टीन का जिक्र आया।

 

टीचर ने आइंस्टीन के बारे में बताया कि वे दोनों हाथों से लिखते थे। ऐसा उन्होंने रोजाना की प्रैक्टिस से ही हासिल किया था। तो हमें काफी ताज्जुब हुआ। उसी दिन हम लोगों ने ठान लिया कि वे भी हर रोज दोनों हाथों से लिखने की प्रैक्टिस करेंगी और ऐसा करके ही दम लेंगी। इसके बाद स्कूल में ही खाली होने वाले एक पीरियड में रोजाना लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी।कुछ ही दिनों में खुद पर विश्वास हुआ कि अब वे ऐसा कर सकती हैं। दोनों हाथों से एक साथ लिखने की स्पीड बनने लगी। लिखावट में भी सुधार आने लगा। फिर एक हाथ से हिंदी व दूसरे से अंग्रेजी लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी।

 

छह महीने के बाद अब उन्हें दोनों हाथों से एक साथ लिखने में कोई परेशानी नहीं होती। चाहे हिंदी लिखें या अंग्रेजी। दोनों हाथों से लिखने में काफी मजा आता है। घरवाले और टीचर भी उनको इस तरह से लिखता देखकर काफी खुश होते हैं।’टीचर कुलदीप सिंह बताते हैं कि सभी छह बेटियां गांव के किसान परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। वे पढ़ाई में भी काफी होशियार हैं। मैं जब कॉलेज स्टूडेंट था, तब मैंने भी दोनों हाथों से लिखने का प्रयास किया था। लेकिन ज्यादा सफल नहीं हो पाया। कुलदीप का कहना है कि वो भी आइंस्टीन से प्रेरित थे। इसलिए जब भी क्लास में आइंस्टीन का टॉपिक पढ़ाता हूं, तो बच्चों को आइंस्टीन की कहानी जरूर सुनाता हूं। मैंने इन लड़कियों को प्रेरित किया तो उन्होंने प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। इसमें उन्हें अब सफलता मिल गई है। वे काफी अच्छे तरीके से दोनों हाथों से लिखती हैं। 

 

साभार-khaskhabar.com

 

 


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login






Mediabharti