
कटरा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को उधमपुर—कटरा रेलवे लाइन राष्ट्र को समर्पित की।
पच्चीस किमी लंबी इस रेलवे लाइन को पूरा करने में करीब 18 साल का लंबा समय लगा है। इसकी वजह यह थी कि इस लाइन पर बनाई गई दस सुरंगों में से एक में लगातार पानी रिसता था। इस कमी को दूर करने के लिए सभी संभव प्रयास किए गए लेकिन उसके बाद भी यह पता नहीं चल पाया था कि पानी कहां से निकल रहा है। हालांकि अंत में विदेशी इंजीनियरों के साथ मिलकर इस समस्या को निदान भी ढूंढ़ लिया।
करीब 11 सौ करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस रेलवे लाइन के शुरू हो जाने के बाद मां वैष्णों देवी की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु दिल्ली से सीधे कटरा तक रेल से पहुंच पाएंगे। पहले उन्हें जम्मू या उधमपुर पर उतरकर वहां से वाया सड़क मार्ग कटरा तक जाना होता था। मां वैष्णों देवी के दर्शन के लिए बेस कैंप कटरा ही है। वहीं से यात्रा की चढ़ाई शुरू होती है।
यह मार्ग कई खासियतों से भरपूर है। इस रेलवे लाइन पर 50 पुल हैं। इसके अलावा इस मार्ग में 10 सुरंग हैं। यहां पर बने एक पुल की ऊंचाई 85 मीटर है। यह कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर से भी अधिक है। इसकी कुल लंबाई 308 मीटर है। इस मार्ग पर पड़ने वाली सुरंगों की लंबाई भी करीब 10.936 किमी है। इस मार्ग पर कुल दो स्टेशन हैं। उधमपुर—कटरा रेलवे लाइन जो 25.624 किमी है, इसकी शुरुआत 1996—97 में हुई थी। उस समय इसकी लागत 183.28 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वहीं अब जब यह प्रोजेक्ट संपन्न हो रहा है तो यह लागत 1090 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इस मार्ग पर आधा सफर क्योंकि सुरंग में है इसलिए इनमें सुरक्षा के इंतजाम भी खास किए गए हैं। सुरंग में सुरक्षा के लिए विंड वेलोसिटी सेंसर, ट्रेन लोकेशन सेंसर, फायर फायटिंग सिस्टम—इंक्यूपमेंट, डायरेक्शन बोर्ड, ऑटोमैटेड हूटर जैसी तकनीक के अलावा इस पूरे मार्ग पर चौबीस घंटे रेलवे सुरक्षा बल और रेल राज्य पुलिस, जीआरपी, को तैनात किया गया है।
उधमपुर—कटरा रेल लाइन सरकार की महत्वाकांक्षी कश्मीर रेल परियोजना का हिस्सा है। इसके तहत कश्मीर को शेष भारत से रेल नेटवर्क से जोड़ने का निश्चय किया गया था। यह प्रोजेक्ट मौजूदा रूप में मूल रूप से अस्सी के दशक में सोचा गया था। हालांकि इससे भी पहले 19वीं शताब्दी में जम्मू—कश्मीर के तत्कालीन राजा महाराजा प्रताप सिंह ने जम्मू और कश्मीर को जोड़ने के लिए रेल लाइन बिछाने की योजना बनाई थी। लेकिन इसमें लगने वाली भारी लागत और परिश्रम और उसके लिहाज से इस लाइन की कम उपयोगिता को देखते हुए उन्होंने इस पर अमल को टाल दिया।
केंद्र सरकार ने जब अस्सी के दशक में इस योजना को तैयार किया तो पहले—पहल इसको लेकर काफी तेजी से काम हुआ। लेकिन फिर इसको लेकर कार्य थोड़ा धीमा हो गया। इसके बाद सरकार ने इस परियोजना की महत्ता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर मान्यता दी।
जम्मू से 50 किलोमीटर दूर शिवालिक रेंज की पहाड़ी पर मौजूद माता वैष्णव देवी मंदिर में हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
इस रूट पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेंगीं।






Related Items
सबकी चेहती अक्षरा जल्द देंगी GOOD NEWS