एग्जिट पोल का जंजाल और 16 तारीख का इंतजार

लेखक

पवन तिवारी

 

हाल में ही देश में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के मतदान के तुरंत बाद देश के कई टीवी चैनलों ने एग्जिट पोल के माध्यम से यह बताने का सिलसिला शुरू कर दिया कि देश में किसकी सरकार बनेगी...।

 

एग्जिट पोल के परिणामों के बाद देश के कुछ दलों में खुशी की लहर है तो कुछ दलों में मायूसी छा गई है। अब सवाल यह है कि एग्जिट पोल के नतीजे कितने सही हैं।

 

एग्जिट पोल के लिए तमाम एजेंसी वोट डालने के तुरंत बाद मतदाता से उनकी राय जानती हैं और उसी राय के आधार पर नतीजे तैयार किए जाते हैं। भारत में चुनाव विकास से लेकर जाति और धर्म जैसे तमाम मुद्दों पर लड़ा जाता है। ऐसे में मतदाता ने किसको वोट दिया है... यह पता करना आसान नहीं होता। ...और, अक्सर मतदाता इस सवाल का सही जवाब नहीं देते हैं।

 

पश्चिम देशों में एग्जिट पोल भले ही सटीक नतीजे देते हो लेकिन भारत जैसे देश में हमेशा से ही एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते आए हैं। सवाल खड़े होने के कई कारण हैं। क्या एक मतदान केन्द्र के बाहर 10 मतदाता या एक विधानसभा से 2000 मतदाताओं के वोट यह तय कर सकते हैं कि देश या प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी...? अक्सर देखा गया है कि विविधताओं से भरे भारतीय समाज में एग्जिट पोल सही आकलन नहीं कर पाते हैं।

Samiksha Bharti News Service 

अभी तक के संभावित चुनाव परिणामों को देखकर यह कहा जा सकता है कि इस बार हुए एग्जिट पोल वास्तविकता से दूर हैं और इस 'भविष्यवाणी' और चुनाव परिणामों के बीच कोई संबंध नजर नहीं आ रहा है। खास कर टाइम्स नाउ के एनडीए के लिए 249 सीट तथा न्यूज 24 के 340 के आकड़े में दूर-दूर तक कोई निकटता नजर नहीं आती हैं।

 

बेहतर यही है कि एग्जिट पोल के इस जंजाल से बचकर क्यों न हम 16 तारीख का इंतजार कर लें...।


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