एमबीए छात्रा के रेप केस में पुलिस की भूमिका को लेकर हाईकार्ट ने लिया संज्ञान

दुराचारी कमलकांत के साथ प्रदेश सरकार और पुलिस की बढ़ीं मुश्किलें

बलात्कार के मामले में जांच बदलने पर प्रदेश सरकार सांसत में

मथुरा। उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष और मथुरा के चर्चित पत्रकार कमलकांत उपमन्यु की मुश्किलें फिर एक जनहित याचिका के चलते बढ़ गई हैं। बार एसोसिएशन मथुरा के अध्यक्ष विजयपाल सिंह तौमर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हाईकोर्ट ने सरकार को आड़े हाथों लिया है।

जांच कैसे बदल गई, इस पर हाईकोर्ट गंभीर है। एमबीए की एक छात्रा से दुराचार करने के आरोपी उपमन्यु के खिलाफ चल रही जांच मनमाने तरीके से बदलने के मामले में हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। जिससे सरकार की परेशानियां भी बढ़ गई। उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की सरकार पर मनमानी कार्यप्रणाली से काम करने पर तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट का कहना है कि वे कौन से कारण थे, जिनके चलते आरोपी के भाई की मांग पर यह जांच जो मथुरा के हाइवे थाने से होनी थी, उसे बदल कर फिरोजाबाद कर दिया गया। जबकि महत्वपूर्ण बात यह है कि पीडि़त लड़की धारा 164 के तहत मजिस्टेªट के समक्ष अपना बयान दर्ज करा चुकी है। संपूर्ण प्रकरण में पैसा किसी काम नहीं आया, तमाम कोशिशों के बाद हाईकोर्ट के संज्ञान से पत्रकार की परेशानियां और बढ़ गई। हाईकोर्ट इलाहाबाद में यह मामला मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयपाल सिंह तौमर की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चन्द्रचूर्ण और जस्ट्सि सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने पुलिस महानिदेशक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर एतराज किया है और इसमें कहा गया है कि पुलिस महानिदेशक के जांच बदलने के पत्र से साफ है कि विवेचना मुख्यमंत्री के ओएसडी (न्यायिक) के पत्र के बाद मथुरा से फिरोजाबाद ट्रांसफर की गई। पुलिस महानिदेशक ने राजनैतिक दबाव में आकर यह निर्णय लिया गया, क्योंकि उन्होंने आगरा जोन के आईजी को जो आदेश दिया, उसमें सरकार की मंशा पर जांच बदलने की बात लिखी है। उन्होंने इसमें अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। 

जनहित याचिकाकर्ता ने खण्डपीठ को बताया कि आरोपी एक पत्रकार और वकील है, उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच बदलवा दी है। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने सीजेएम मथुरा को कहा है कि वह इस आदेश की जानकारी पीडि़त लड़की और उसके परिवार को दें, इस मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को होनी है। हाईकोर्ट खण्डपीठ के इस जनहित याचिका को संज्ञान लेने के बाद मथुरा में जहां न्यायिक अधिकारियों में खलबली है वहीं पत्रकार और उसका साथ तमाम रसूखदारों में भी हड़कंप है। आपको बता दें कि 06 दिसम्बर 2014 को हाइवे की नटवर नगर निवासी युवती की रिपोर्ट हाइवे थाने में दर्ज हुई थी जिसमें पत्रकार कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ धारा 376 और 506 के तहत मुकद्मा दर्ज हुआ था। 

इस घटना के बाद मामले को पूरी तरह दबाने के मैराथन प्रयास हुए, जनपद के कुछ प्रतिष्ठित लोगों ने भी पत्रकार को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि कि समाज का विश्वास बनाये रखने के लिए पुलिस को मनमाने ढंग से किसी विवेचना को ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं है। अगर यदि पुलिस ऐसा करेगी तो उससे समाज का विश्वास समाप्त हो जायेगा और अपराध बढ जायेंगे और आरोपी पुलिस कार्यवाही व विवेचना को अपने हित में एक औजार की तरह से प्रयोग नहीं कर सकेगा।

उच्च न्यायालय की यह तल्ख टिप्पणी स्वयं इस मामले पर न्यायालय के गंभीर दृष्टिकोण को बयान करती है और यह जनहित में समाज के विश्वास को बनाये रखने के लिए अति महत्वपूर्ण है। माननीय उच्च न्यायालय ने संदर्भ लिया है कि क्यों न विवेचना को पुनः मूल जनपद मथुरा में ही स्थानान्तरित किया जाये, जहां एफआईआर दर्ज हुयी है।

 


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