कब थमेगा इंसानियत को शर्मसार करने का सिलसिला...

लेखक. पवन तिवारी

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान।

बदायुं की घटना ने फिर से एक बार देश के सभ्य समाज को लज्जित किया है। वास्तव में यह किसी नारी का नहीं बल्कि पूरे समाज का अपमान है। देश में हो रहीं इस तरह की घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि हमारे देश का कानून पूरी तरह नपुंसक है और उससे किसी को कोई डर नहीं है।

हमारा समाज पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है और हम तरक्की की रफ्तार पर सवार होकर आगे बढ़ भी रहे है लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है हमारे समाज में नारियों का स्थान। बेशक आज की महिला हर क्षेत्र में अग्रणी है पर आज भी हमारे समाज में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके कारण हमारे देश की नारी सुरक्षित नहीं है।

हमारे समाज में नारियां सदियों से परीक्षा देती आ रही हैं और आज भी दे रही हैं। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक कलंक है और समाज को इस कंलक से बार-बार अपमानित होने से बचाने के लिए कुछ न कुछ तो प्रयास करना होगा।

जन्मदात्री को अपमानित करने वाले तत्वों को ऐसी कठोर सजा दी जानी चाहिए कि फिर महिलाओं को अपमानित करने को बारे में कोई सोच भी न सके।कब थमेगा इंसानियत को शर्मसार करने का सिलसिला...  

लेखक. पवन तिवारी

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान।

बदायुं की घटना ने फिर से एक बार देश के सभ्य समाज को लज्जित किया है। वास्तव में यह किसी नारी का नहीं बल्कि पूरे समाज का अपमान है। देश में हो रहीं इस तरह की घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि हमारे देश का कानून पूरी तरह नपुंसक है और उससे किसी को कोई डर नहीं है।

हमारा समाज पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है और हम तरक्की की रफ्तार पर सवार होकर आगे बढ़ भी रहे है लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है हमारे समाज में नारियों का स्थान। बेशक आज की महिला हर क्षेत्र में अग्रणी है पर आज भी हमारे समाज में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके कारण हमारे देश की नारी सुरक्षित नहीं है।

हमारे समाज में नारियां सदियों से परीक्षा देती आ रही हैं और आज भी दे रही हैं। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक कलंक है और समाज को इस कंलक से बार-बार अपमानित होने से बचाने के लिए कुछ न कुछ तो प्रयास करना होगा।

जन्मदात्री को अपमानित करने वाले तत्वों को ऐसी कठोर सजा दी जानी चाहिए कि फिर महिलाओं को अपमानित करने को बारे में कोई सोच भी न सके।


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