कान्हा की नगरी में अनेकों गौशाला होने के बावजूद गाऊवंश की दुर्दशा

कान्हा की नगरी गिर्राज धाम में कूडे के ढेर पर भोजन तलाशती एक गाय

गोवर्धन। श्रीकृष्ण की नगरी गिर्राज धाम गोवर्धन में भगवान श्रीकृष्ण की सर्व प्रिय गो माता की दुर्दशा का हाल किसी से छिपा नही है। गिर्राज महाराज की तलहटी में गायों के नाम पर अपनी जीविका चलाने वाली स्वयं सेवी संस्थाऐं भी गो भक्तों को काफी ठेस पहुंचा रहे है। जिस गौ माता के नाम पर ये संस्थाऐं करोडों रूपये का चन्दा इकट्टा कर रहे है। आज वही गो माता पूरे ब्रज क्षेत्र में दर दर की ठोकरें खाने को विवश नजर आ रही है।

गिर्राजधाम में गायों को चारे की बजाए पोलीथीन, कचरे के ढेर के सहारे अपना जीवन व्यतीत करना पड रहा है। ये स्वंय सेवी संस्थाऐं न जाने कोन सा पाठ गौ भक्तों को पढाते जो कि अपनी सुद बुद खोकर लाखों करोडों रूपये की धन राशि दान के रूप में इन संस्थाओं के लिए दे देते है। लेकिन ये स्वयं सेवी संस्थाऐं इस पैसे का उपयोग अपने निजी स्वार्थाे में करते नजर आते है। अगर ये स्वयं सेवी संस्थाऐं इस पैसे का पूर्ण रूप से गाय के हित में खर्च करें तो श्रीकृष्ण की नगरी में गाय की इतनी दर्दशा न हो कि उसे अपने पेट को भरने के लिऐ कूडे कचडे के ठेर पर भोजन खाना पडे। इन दान वीरों को तो इस बात से भी कोई फर्क नही पडता है कि उनका पैसा गाय के हित में भी लग रहा है या नही। ये कौन सा धर्म है कि सिर्फ धन राशि देने से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है। चाहे उस पैसा का ये निजी संस्थाऐं अपने निजी स्वार्थ के लिऐ खर्च कर रही हो। जबकि धर्म गुरूओं की माने तों अपने हाथों से किया गया दान ही सर्वाेपरि होता है। जब ब्रज में इतनी गौशालाऐं होने के बाद भी हमारे ब्रज की गायें कूडे के ढेर पर भोजन कर अपना जीवन व्यतीत करती है तो ये दान भी किस काम का है।


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