मथुरा। साहित्य के साथ दर्शन शास्त्र दोनों का विचित्र मेला है। दर्शन शास्त्र में आलोचनात्मकता समावेश है उक्त विचार परशुराम जयंती के सप्ताह के अंतिम दिन सर्वोदयी ब्राह्मण विकास संस्थान मथुरा द्वारा आयोजित काव्य संगोष्ठी एवं समापन समारोह के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर डैम्पीयर नगर में क्षेत्राधिकारी मथुरा पर चक्रपाणि त्रिपाठी ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर हुकुम चंद तिवारी, इन्द्र कुमार वशिष्ठ, प्रतिमा शर्मा, अनामिका दीक्षित, माधुरी शर्मा, डा़ राजकुमार रंजन आगरा आदि ने किया। सरस्वती वंदना अशोक द्वारा की गई।






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