भारतीय किसान यूनियन की सेठ बीएन पोद्दार ग्राउण्ड पर हुयी महापंचायत में देश के गरीब और किसानों को लेकर प्रस्ताव पारित किये गये।
मथुरा। भारतीय किसान यूनियन के सम्मेलन में आज वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान और श्रमिकों की दशा बिगड़ रही है। कर्ज के कारण आत्महत्या करने को किसान विवश हो रहे हैं। भाकियू की विशाल महापंचायत में देश के ग्रामीणों की दुर्दशा पर प्रस्ताव पारित किये गये। यमुना मुक्तिकरण आंदोलन में प्रधानमंत्री से लेकर संबंधित विभागों ने आश्वासन तो खूब दिये लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। केन्द्र सरकार ने ओलावृष्टि से नुकसान की क्षतिपूर्ति हेतु कोई बजट नहीं दिया जिससे किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका। किसानों के 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत सहमति के बिना दो फसली भूमि का अधिग्रहण न किया जाये। गन्ना किसानों का करोड़ांे का बकाया सूद सहित भुगतान किया जाये। कृषि को उद्योग का दर्जा दिया जाये। सरकार की गलत नीतियों के कारण कर्जदार हुये किसान की क्रय शक्ति दिनों दिन घट रही है। किसानों के सभी कर्जे माफ हों जिससे वे आत्महत्या को मजबूर न हांे और नये सिरे से अपना जीवन शुरू कर सकें। प्रधानमंत्री द्वारा साठ वर्ष पूरा कर चुके सभी श्रेणी के किसानों को पंाच हजार रूपये प्रतिमाह की दर से पेंशन का शासनादेश तुरंत जारी हो। नहर और रजवाहों में टेल तक पानी पंहुचाया जाये। फसल बीमा किसानों का दोहन है, इसे एैच्छिक किया जाये। देश में दोहरी शिक्षा नीति समाप्त की जाये। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, सलाहकार राधाकांत शास्त्री, उपाध्यक्ष रतन सिंह, प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र शास्त्री, राष्ट्रीय महासचिव सुनील सिंह, मुख्य महासचिव हरीश ठेनुआ, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, अनिल मलिक, रामगोपाल सिंह, रेशमपाल सिंह, रीतराम सिंह, रमेश सिकरवार, ओमप्रताप सिंह, जगदीश रावत सहित भारी संख्या में किसान यूनियन के सदस्य मौजूद थे।






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