
रालोद कांग्रेस गठबन्धन प्रत्याशी जयन्त चैधरी व भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी
मथुरा। लोकसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेंस गठबन्धन के साथ साथ सपा, बसपा, आप पार्टी के उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार अब पुरी प्रगति की ओर अग्रसर है। फिल्म स्टार हेमा मालिनी के भाजपा उम्मीदवार बनने से अब यह संसंदीय क्षेत्र वीआईपी हो गया हैं। इस सीट को लेकर राजनैतिक दिग्गजों की नजर इस पर लगी हुई हैं। सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी चुनाव समर में आने के बाद रालोद के स्टार प्रचारक व प्रत्याशी अपने गढ़ को बचाने में सफल हो पायेगे या हेमा मालिनी अपने ग्लेमर के बल पर भाजपा को इस सीट पर पुनः काबिज कराने में सफल होगी। हालांकि की अभी लोग विभिन्न दलों के स्टार प्रचारकों की सभाओं का इन्तजार कर माहौल को समझने में लगें है। लोगों का मानना है कि अभी भाजपा, रालोद-काग्रेंस गठबन्धन के बीच माना जा रहा मुकावला बसपा सुप्रीमों और सपा के स्टार प्रचारकों के आने के बाद त्रिकोणात्मक या चतुर्कोणीय व बन सकता हैं। राजनैतिक विशेषज्ञों की नजर शहरी क्षेत्र के बढ़ी संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग मुस्लिम मतों पर है कि यह मत इस बार किसके साथ जायेगा। क्योंकि पिछलें समय में इस वर्ग का नतीजा लगभग यह रहा है कि चाहे सपा हो बसपा हो या कांग्रेंस जो भी दल भाजपा को हराने में सक्षम नजर आता है मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर उसी की तरफ लामबन्द होता रहा हैं। इसी के चलते यह देखना आवश्यक है कि बसपा सुप्रीमों जिनका जनपद में एक मजबूत आधार है उसके साथ साथ अपना प्रत्याशी के पक्ष में सभाकर क्या मुस्लिम मत को बसपा के समर्थन में मोड़ पाने में सफल हो पाती है अगर ऐसा होता है तो जनपद का चुनाव त्रिकोणात्मक हो सकता हैं और परिणाम भी नया आ सकता हैं और वर्तमान सांसद जयन्त चैधरी को अपना गढ़ बचाने में परेशानी पैदा हो सकती हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी का अन्तरीय संघर्ष अभी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद भी समाप्त नहीं हुआ हैं। इसके वावजूद भाजपा का उच्च नेतृत्व केवल हेमा के ग्लेमर के पीछें दौड़ रहें जनसमुदाय को अपना वोट बैंक समझ जीत सुनिश्चित मान रहा हैं। वहीं रालोद कांग्रेेस के गठबन्धन उम्मीदवार पुरी ताकत के साथ अपने गढ़ को बचाने में लगें हुए है उनकी पत्नी चारू चैधरी एक मजें हुए राजनैता के तरह गाॅव गाॅव और नगर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अपनी पति जयन्त चैधरी के समर्थन में जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने में जुटी है। होने वाले मतदान के बाद हेमा का ग्लेमर कामयाव होगा या रालोद काग्रेंस गठबन्धन उम्मीदरवार अपने गढ़ को बचाने में सफल होगे। यह तो केवल 16 मई को आने वाला चुनाव परिणाम ही सिद्ध करेगा।






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