मुडि़या मेला ही कर जाता है वर्ष भर की रोजीरोटी का इंतजाम, खानपान और पूजा सामिग्री में करोड़ों की कमाई, इस मेले में व्यवसायी कमायेगें लाखों़ रूपये
राधकुण्ड। श्री गिर्राज धाम में मुडि़या पूर्णिमा मेला का वर्ष भर इंतजार करने वाले गोवर्धन के व्यवसायियों ने भी तैयारियां प्रारंम्भ कर दी है। सात दिन का यह मेला उनके लिए वर्ष भर की रोजी-रोटी का इंतजाम कर जाता है। खानपान और पूजा सामिग्री विक्रेताओं के लिए तो यह मेला एक बड़ा वरदान है। सात दिनों में लाखों की कमाई करने वाले दुकानदारों को सांस लेने की भी फुर्सत नही मिलती। यंू तो मुडि़या पूर्णिमा मेले में उमड़ने वाली भीड़ का कोई अधिकृत आंकलन नही कर सका, लेकिन प्रशासन व लोगों का मानना है कि एक करोड़ से भी अधिक श्रद्वालु इन सात दिनों में गोवर्धन में गिर्राज परिक्रमा करने श्रद्वालु भक्त आते है। वे कुछ भी न खरीदें, लेकिन अकेले खानपान और पूजा सामिग्री पर एक श्रद्वालु कम से कम सौ रूपए जरूर व्यय करता है। यह वजह है कि मेले में 90 फीसदी से अधिक स्थाई दुकानें व ढ़केलें पूजा सामिग्री खानपान और प्रसाद की लगती है। दूध,फूल और प्रसाद की ब्रिकी करोंड़ो में होती है। इसके अलावा चाय-पानी और खानपान पर इससे कई गुना ज्यादा खर्च किया जाता है। यही वजह है कि कस्बे में खानपान की सामिग्री का जम कर भंड़ारा किया जाता है। कस्बे के अलावा आप-पास के गांवों में से भी सैंकड़ों लोग दुकान जमाने पहुॅच जाते है। मुडि़या पूर्णिमा मेला पर उनको यहां होने वाली धनवर्षा का इंतजार है। ऐसी दुकानों को अस्थाई विधुत कनेक्शन देने के इंतजाम भी विधुत विभाग को करने पड़ते है। दानघाटी,मानसी गंगा,सौंख अड्डा,डीग अड्डा,बड़ा बजार दसविसा राधकुण्ड बजार,राधाकुण्ड अड्डा आदि प्रमुख बजारों की तरह समूचे 21 किलो मीटर लंबे परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह दुकानें लगने लगी है। कस्बावासियों के लिए मुडि़या पूर्णिमा मेला वर्ष भर की रोजी रोटी देने वाली फसल के समान है। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। कि सात दिन तक ये दुकानें एक मिनट के लिए भी बंद नही हो सकेंगी। प्रशासन को भी इन दुकानों से होने वाले अस्थाई अतिक्रमण को हटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन ये दुकानदार अतिक्रमण को घन्टे भर के लिये ही हटाते फिर उसी स्थान पर रख दुकान को लगाकर अपने धन्धे में ब्यस्त रहते है।





