
इंद्र का मानमर्दन करने को बालकृष्ण ने उठाया गिरीराज
भगौसा में बह रही श्रीमद्भागवत की रसधार
कथा श्रवणपान कराने व्यास यादराम उपाध्याय।
गिर्राज जी के समक्ष छप्पन भोग के भव्य दर्शन।
गोवर्धन। वर्षों से इंद्र की पूजा करते आ रहे ब्रजवासियों से बालकृष्ण भगवान श्रीकृष्ण ने जब गिरीराज पूजा कराने का प्रस्ताव रखा तो ब्रजवासियों में असमंजस भाव पैदा हुआ। इस दौरान वह बाद में हर्षोल्लास के साथ गिरीराज पूजा करने गोवर्धन पहुंचे और धूमधाम से गिरीराज पूजा की। यह देख देवराज इंद्र कुपित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार वर्षा आरम्भ कर दी। इंद्र का अभिमान मिटाने के लिए बालकृष्ण भगवान ने गिरीराज पर्वत को अपनी उंगली के नख पर धारण कर लिया। यह देख इंद्र को ब्रह्म की अनुभूति हुई और क्षमा याचना करते हुए वह श्रीकृष्ण के चरणों में नतमस्तक हो गया।
यह वचन गोवर्धन के गांव भगौसा में पथवारी देवी मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान व्यास यादराम उपाध्याय ने कथा रसपान कराते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं से कहे। उन्होंने बताया कि संसार में अभिमान किसी का भी नहीं रहा है। अभिमानी जीव का अभिमान चूर करने के लिए परमात्मा स्वयं लीला रचते हैं। भागवत कथा के छठवें दिन रूक्मणी विवाह की कथा का श्रवणपान कराया। इससे पूर्व व्यास यादराम उपाध्याय ने गोवर्धन पूजा की कथा विस्तार से बताई। यहां गिर्राज जी के समक्ष छप्पन भोग का आयोजन किया गया। वहीं व्यास जी द्वारा राधा-कृष्ण के महारास का वर्णन भी किया गया। जिसे सुन श्रद्धालु हतप्रभ रह गए। जिसके दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। गिर्राज महाराज की जय जयकार से कथा मण्डप गुंजायमान होता रहा। कथा समापन गुरूवार को एवं भण्डारे का आयोजन शुक्रवार को होगा। जिसमें अनेक संत-महात्मा एवं ग्रामीणजन भाग लेंगे।
इस मौके पर श्रद्धालुओं में विशेष रूप् से पं़ खैमचंद उपाध्याय, रोशनलाल उपाध्याय, लोकी पंडित, संतोष, बंटू, परमानंद पंडित, महेन्द्र पंडित, पे्रमचंद बघेल, प्रेम सिंह बघेल, गणेश उपाध्याय, लोकेश, गोकुलचंद, ब्रजेश, शिवम सहित अन्य मित्र मण्डली के लोग उपस्थित रहे।






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