
मथुरा। लीला पुरुषोत्तम योगीराज भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से कुरुक्षेत्र की रणभूमि में धनुर्धर अर्जुन को कर्तव्य बोध कराने के उद्देश्य से निःसृत हुई अमृतवाणी के 18 अध्याय किस तरह इस अर्थ प्रधान घोर कलियुग में मनुष्य के लिये एक मात्र कल्याण व शान्ति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है सर्व विदित ही है। स्वार्थ की दौड़ में आकण्ठ डूबे मानव को नई दिशा का ज्ञान कराने के उद्देष्य से श्रीमद् भगवद् गीता जी की जयंती के पावन अवसर पर एक विद्वत गोष्ठी का आयोजन श्री कृष्ण जन्मस्थान स्थित भागवत भवन के दक्षिणी सभागार में मंगलवार 02 दिसंबर को पूर्वान्ह 11 बजे से किया गया है। सेवा संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार गोष्ठी में गीता चिंतक डा0 श्रीकृष्ण चन्द्र जी शास्त्री जी श्रीमद् भगवद् गीता जी की वर्तमान परिवेश में महत्ता पर गीता प्रेमियों के समक्ष अपना चिंतन रखेंगे। संस्थान द्वारा गीताजी का नित्य पाठ करने का संकल्प लेने वाले 500 भगवद् भक्तों को श्रीमद् भगवद् गीता जी की भावार्थ सहित पुस्तक भेंट की जायेंगी। नित्यपाठ के संकल्पकर्ता सोमवार सांय 5 बजे तक श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित गीता रामायण पत्र व्यवहार विद्यालय में संपर्क कर अपना संकल्प अंकित कराने हेतु आमंत्रित हैं। संस्थान द्वारा सभी भक्तों से अधिकाधिक संख्या में गोष्ठी में उपस्थित होकर गीताजी के माहात्म्य का लाभ उठाने की अपील की है।






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