गुरू के सम्मान को बनाये रखना नैतिक दायित्व

मथुरा । ज्ञान दीप शिक्षा भारती के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा प्रबंध-तन्त्र ने गीत-संगीत-काव्य-पाठ के अनन्तर नव वर्ष आयोजन की शुभ कामनाओं के साथ नव वर्ष आयोजन को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया। आयोजन का ज्ञानदीप के संस्थापक मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा विद्या-वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप-प्रज्ज्वलन करते हुए आह्वान किया कि विद्यार्थियों को शिक्षा देना मात्र वैतनिक कार्य नहीं है। यह आज की पीढ़ी को शिक्षित कर समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिक्षिकाएं आगामी वर्ष को आदर्श वर्ष बनाने के लिये आत्म-विश्लेषण कर शैक्षिक योगदान का संकल्प लें। शैक्षिक निदेशक केजी माहेश्वरी ने कहा कि समाज शिक्षक-वर्ग को गुरु के रूप में जो सम्मान देता है उस सम्मान को बनाए रखना उसका नैतिक दायित्व है। प्रधानाचार्या निधि भाटिया ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षक-वर्ग वर्षभर के अनुभव के आधार पर आत्म- विश्लेषण कर विद्यार्थियों को संस्कारित शिक्षा प्रदान करें। इस अवसर पर भावना शर्मा, प्रियंका अग्रवाल, जयभूषण शर्मा, संध्या सक्सेना आदि ने गीत एवं नृत्यों की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का संचालन कुसमा सिंह, संदीप कुलश्रेष्ठ तथा विश्वबंधु चतुर्वेदी ने किया।

 


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