गोद लिए जाने के दो साल बाद भी बदहाल है ‘रावल’

मथुरा : तीन लोक से न्यारी बृज भूमि को 'छलिया' की नगरी कहा जाता है। आनंदकंद भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली और उसकी बृजरज में जन्मे बृजवासी जिनकी भाषा शैली भले ही अक्खड़ हो लेकिन हृदय से वे आज भी उतने ही भोलेभाले हैं और इसी के चलते वे बार-बार छले जाते रहे हैं। 


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