ग्रामीणों द्वारा रंगेहाथों दबोच कर पुलिस को सौंपा लुटेरा थाने से गायब

तीन दिन तक हवालात में बन्द रख कर बीमार बताकर छोड़ दिया

पीडि़त की रिपोर्ट लिखने के बजाय लूट में जेल भेजना बताती रही पुलिस

थानाध्यक्ष के अनुसार 151 में निरूद्ध कर पागलखाने में भर्ती कराया

ग्रामीणों ने लगाया पुलिस पर मोटी सांठ गांठ कर छोड़ने का आरोप

राया। थाना क्षेत्र के गांव सुथरिया में करीब एक पखवाड़े पूर्व आपराधिक वारदात को अंजाम देने आये करीब आधा दर्जन सशस्त्र बदमाशों से ग्रामीणों ने लोहा लेकर न सिर्फ उन्हें खदेड़ दिया बल्कि एक बदमाश को पकड़कर उसे पुलिस के सुपुर्द भी कर दिया। लेकिन थाना पुलिस ने उसे तीन दिन हवालात में रख पूछताछ कर उसे बीमार बताकर छोड़ दिया। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस उन्हें झूठा आश्वासन दे रही है कि उसे जेल भेज दिया गया है और उसके साथियों की तलाश जारी है। लेकिन जब ग्रामीण मामले की हकीकत से रूबरू हुए तो उनमें पुलिस के खिलाफ अच्छा खासा आक्रोश पनप गया। ग्रामीणो का आरोप है कि पुलिस ने भरतपुर से आये उसके साथियों से मोटा लेन देन का सौदा कर उसे बीमार बता कर थाने से ही छोड़ दिया है। जबकि पूछने पुलिस उसे पागल बता रही है और उसे शान्ति भंग करने के आरोप में पहले जेल भेजने और फिर उसे पागलखाने में भर्ती करने की बात स्वीकार रही हैै। 

विदित हो कि विगत करीब एक पखवाड़े पूर्व रात्रि में थाना क्षेत्र के गांव सुथरिया में करीब आधा दर्जन सशस्त्र बदमाशों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने पहले से रेकी कर चुके नबाब सिंह पुत्र उम्मेद सिंह के घर को अपना शिकार बनाया। बदमाशों ने नबाब सिंह के घर की छत पर पहुंच कर पहले अपने एक साथी को घर में नीचे उतारा लेकिन घर में जागी हुई महिलाओं ने उस बदमाश को देखकर शोर मचा दिया। शोर सुनकर नबाब सिंह और परिजनों ने मिलकर बदमाश को दबोच लिया और शोर मचा मचाकर ग्रामीणों को एकत्रित कर लिया। उधर बदमाशों ने साथी को छुड़ाने के लिये छत से ही फायरिंग शुरू कर दी। एकत्रित हुए ग्रामीणों ने भी जबाब में फायरिंग खोल दी। फायरिंग करते हुए जब ग्रामीणों ने बदमाशों का घेराब शुरू किया तो वे जान बचाकर भाग निकले। लेकिन नबाब सिंह के घर में बन्धक बना बदमाश ग्रामीणों ने दबोच लिया। ग्रामीणों के अनुसार पहले तो उसकी जमकर मरम्मत कर डाली पूछने पर उसने ग्रामीणों को बताया कि उसका गैंग यहां मधुमक्खी पालन का काम कर रहे है और दिन में नबाब सिंह के घर की रेकी कर रात में वारदात को अंजाम दिया है। उसने बताया कि उसके सभी साथी बाहर के है और एक साथी निकट के गांव आयरा खेड़ा निवासी गुडडू पुत्र प्रताप सिंह है। कन्ट्रोल रूम पर सूचना देकर ग्रामीणों ने इलाका पुलिस को बुला लिया और पकड़े गये बदमाश को उससे बरामद तमंचे सहित पुलिस को सौंप दिया। पुलिस बदमाश को गिरफ्तार कर थाने ले आयी और उसे तीन दिन तक हवालात में रखा। लेकिन चैथे दिन अचानक वो बदमाश हवालात से गायब नजर आया। उसी बदमाश की निशानदेही पर पुलिस ने आयरा खेड़ा निवासी गुडडू के घर दबिश देकर गुडडू के न मिलने पर उसके पिता प्रताप सिंह को उठाकर थाने ले आयी। पुलिस ने तीन दिन तक प्रताप सिंह को भी थाने में बिठाये रखा और उसे भी थाने से ही छोड़ दिया। घटना की तहरीर देने वाले उम्मेद सिंह ने आरोप लगाया है कि न तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट ही दर्ज की और न ही गिरफ्तार किये गये बदमाश और उसके साथियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही की। उम्मेद सिंह के अनुसार पुलिस ने भरतपुर से बुलाये उसके साथियों से सांठ गांठ व मोटा लेन देन कर बदमाश को छोड़ दिया। ग्रामीणों के अनुसार बदमाशों का ये गिरोह बाबरिया गैंग कहलाता है और बहुत ही खतरनाक गिरोह है। वहीं थानाध्यक्ष राया राजा सिंह से जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने ग्रामीणों द्वारा पकड़े गये बदमाश को पुलिस को सौंपा जाना स्वीकार किया लेकिन जेल भेजने के नाम पर उन्होनंे बताया कि उसके खिलाफ सिर्फ शान्ति भंग के आरोप में कार्यवाही हुई थी। बाद में उसे पागलखाने में भर्ती कराना पड़ा। थानाध्यक्ष के अनुसार ग्रामीणों द्वारा साथियों से मुठभेड़ कर रंगे हाथों लूट का प्रयास करते हुए पकड़ा गया उक्त बदमाश एक पागल था। ग्रामीणों ने उसे बेवजह पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था और वह पागल पुलिस के लिये सिरदर्द बन गया। 

ग्रामीणों द्वारा रंगे हाथों लूट का प्रयास करते हुए उसके साथियों से मुठभेड़ कर दबोचे गये बदमाश के खिलाफ लिखित तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कड़ी कानूनी कार्यवाही नहीं की। बल्कि पुलिस तहरीर देने वाले को तभी से झूठा आश्वासन दे रही है कि पुलिस ने उसे लूट के आरोप में जेल भेज दिया है। यदि वह पागल था तो पुलिस ने उसे तीन दिन तक हवालात में किस अधिकार से बन्द रखा और उसके खिलाफ शान्ति भंग करने के आरोप में कार्यवाही क्यों की। यदि शान्ति भंग की धारा 151 में उसकी जमानत हो गयी तो उसकी जमानत किसने दी। यदि जमानत देने उसके परिजन आये थे तो पलिस ने उसे परिजनों को सौंपने की बजाये पागलखानें क्यों भेज दिया इतने पर भी पुलिस पीडि़त शिकायतकर्ता से ये झूठ क्यों बोल रही है कि उसे लूट के आरोप मे जेल भेजकर उसके साथियों की तलाश की जा रही है ऐसे अनेकों सवाल इस मामले में पुलिस की ऐसी कार्यप्रणाली से पैदा होकर पुलिस की भूमिका को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहे है और उनका जबाब देने को कोई भी पुलिसकर्मी सामने नहीं आ रहा है। जबकि ग्रामीण आरोप लगा रहे है पुलिस ने मोटी सांठ गांठ कर आरोपी थाने से ही छोड़ दिया और उसके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं की गयी। थाने के सूत्र भी इस मामले में यही हकीकत स्वीकार कर थानाध्यक्ष की कार्य प्रणाली पर आरोप लगा रहे है। वास्तव में इस मामले का सच तो तभी निकल कर सामने आ पायेगा जब कोई उच्चाधिकारी इस मामले की सघनता से जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करेंगा।

 


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