देश में जब अंग्रेजी कुशासन का दौर चल रहा था तब उन्हें सीधे-सीधे चुनौती देने एवं ललकारने का साहस मालवा में सीहोर की धरती पर कुंवर चैन सिंह ने दिखाया। उन्होंने अपने साथियों के साथ फिरंगियों से लोहा लिया उन्हें नाको चने चबवाए लेकिन अंत में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति का पहला शहीद मंगल पांडे को माना जाता है। मगर कुंवर चैन सिंह की शहादत मंगल पांडे के शहीद होने की घटना से भी करीब 33 वर्ष पहले की है।






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