जयगुरूदेव आश्रम के होली सत्संग मेले में दिये विभिन्न प्रचारकों ने उपदेश

मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम मेें होली सत्संग.मेला के दूसरे दिन संस्था के राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चन्द्र जी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि ब्रज की होली का विश्व में अपना एक पहचान है। बाबा जयगुरुदेव जी महाराज अपने सत्संग वचन में ब्रज रज की महिमा का वर्णन किया करते थे। जयगुरुदेव आश्रम में इसी पवित्र रज को पुरुषए पुरुषों तथा महिलाए महिलाओं को तिलक लगाकर अपने भूल.चूक की एक दूसरे से गले मिलकरए पैर छू कर माफी मांगते हैं। उपदेशक ने कहा कि सत्पुरुष भगवान ने सोलह पुत्रों को अपने देश से नीचे भेजा। जिसमें से सन्तों.महापुरुषों ने चार का भेद बताया है। सबसे छोटे पुत्र निरंजन भगवान हैंए जिन्हें काल प्रभु कहते हैं। ये तीन लोक के मालिक हैं। सतयुगए त्रेताए द्वापर पूर्ण रूप से इनके आधीन है। केवल कलयुग में ही प्रकट सन्तों का आना हुआ। गुप्त सन्त सभी युगों में रहते हैं और वक्त जरूरत पर भक्तवत्सल बन कर जीवों की सम्हाल करते हैं। परन्तु केवल प्रकट सन्त ही जीवों को नाम भेद ;सुरत. शब्द योगद्ध को बताकर उनको निजघर सतलोक पहुँचाते हैं। बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अथक मेहनत कर करोड़ो लोगों को नामभेद दिया। सन्तों द्वारा डाले गये पाँच नाम का बीज कभी नष्ट नहीं होता है। समय आने पर वह बीज जम जायेगा और लोग साधना करने लगेंगे। उन्होंने आगे कहा कि मन काल प्रभु का वकील हैए यह सुरत को माया के बाजार में लेकर भूल गया है। इस संसार में जो कुछ दिखाई दे रहा हैं इसी मन का खेल है। इसको वश में नहीं किया जा सकता है। जब कारण बीज का नाश होता हैए तो मन सुरत का साथ छोड़ देता है और मोह का नाश हो जाता है। कामए क्रोधए लोभए मोह और अहंकार इसके सेनापति हैं। दोनों आँखों के पीछे दो दल कमल पर मन की रणभूमि है। वहाँ लड़ाई लड़नी पड़ती है। यह केवल गुरु की दया से मरता है। जब साधक तड़प के साथ साधना करता है तो गुरु की कृपा से सुरत जाग जाती हैए तब ये पाँचो भूत एक.एक कर मर जाते हैं। डाॅ0 करुणा कान्त मिश्रा जी ने कहा कि जिस प्रकार वर्षा की बूँद ऊपर से निर्मल आती है और मिट्टी में पड़ते ही गन्दी हो जाती है और जब सूर्य की तेज किरणें पड़ती है तो भाप बनकर ऊपर उड़ जाती है और गन्दगी नीचे छूट जाती है। इसी प्रकार जीवात्मा ऊपर में निर्मल आई है लेकिन शरीर बन्धन में आने के कारण कर्मों के द्वारा इस पर गन्दगी जमा हो गई है। अब जब जीव को महापुरुष मिलेंगे तो साधना के द्वारा गन्दगी को छोड़कर अपने घर सतलोक पहुँच जायेगी। पंकज बाबा ने होली के पूर्व सन्ध्या पर देश के लोगों को होली की हार्दिक शुभ कामना देते हुये चैत मास में लगने वाले नये संवत में लोगों के सुख.समृद्धि और खुशहाली के लिये अपने गुरु महाराज से प्रार्थना किया और कहा कि आने वाले इस नव वर्ष में लोग शाकाहारी तथा नशा मुक्त रहने का संकल्प लें जिससे अच्छे समाज का निर्माण हो सके। प्रातः 5ण्00 बजे से मन्दिर और समाधि स्थल से प्रसाद का वितरण प्रारम्भ हो जायेगा। रेलवे टिकट घर से सभी स्टेशनों के लिये टिकट मिलना प्रारम्भ हो गया है। मेले में दर्जन भर दहेज रहित विवाह सम्पन्न कराये गये। मन्दिर की सजावट दर्शनीय है।


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