मथुरा। जयगुरुदेव मन्दिर पर आयोजित पाॅच दिवसीय गुरुपूर्णिमा सत्संग मेला में भाग लेने बडी़ संख्या में श्रद्धालुओं का मेला परिसर में पहुंचना शुरू हो चुका है। नेपाल राष्ट्र सहित बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं और अभी भी श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा हुआ है। प्रातःकाल प्रार्थना, नामयोग साधना अभ्यास व जयगुरुदेव महराज के सत्संग वचनों की याद के साथ मेला प्रारम्भ हो गया। संस्था के राष्ट्रीय उपदेशक डा. करुणाकान्त व सतीश चन्द्र ने श्रद्धालुओं को प्रवचन दिए। डा. करुणाकान्त ने कहा कि जब जीव माॅ के गर्भ में आता है तो उस समय उसको पूरा ज्ञान रहता है। गर्भ की असहनीय पीड़ा में जीव (सुरत) प्रभु से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! मुझको इस अग्नि कुण्ड से जल्दी बाहर निकाल दीजिए, मैं सभी कामों को छोड़कर दिन-रात आपका भजन करूंगा। लेकिन गर्भ से बाहर आते ही, उस पर मोह-ममता का पर्दा पड़ जाता है और अपने किये गये प्रभु-भजन के वादे को भूल जाता है। मोह-ममता में इस तरह उलझ जाता है कि इस सुनहरे अवसर में, वेशकीमती शरीर से जड़ चीजांे के भोग भोगने में समाप्त कर देता है। श्रद्धालु सत्संग में भाग लेने के चले आ रहे हैं। मन्दिर की सजावट लोगों के ध्यान को अनायाश आकर्षित कर रही है।





