जयगुरूदेव की महाप्रयाण तिथि पर वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला 16 से- पंकज बाबा

बाबा जयगुरूदेव के द्वितीय वार्षिक सत्संग मेले की जानकारी देते पंकज बाबा

 

मथुरा। आगरा दिल्ली बाई पास मथुरा स्थित जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था व ट्रस्ट के संस्थापक बाबा जयगुरुदेव के 18 मई 2012 को हुए महाप्रयाण के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यहाँ 6 दिवसीय द्वितीय वार्षिक भण्डारा सत्संग मेले का आयोजन 16 से 21 मई 2014 तक किया जा रहा है। लगभग 750 वर्षों में कलयुग में सन्तों फकीरों के आने का सिलसिला प्रारम्भ हुआ। सन्त कबीर, गोस्वामी जी, नानक, रैदास, मीरा, दरिया साहब, पल्टू साहब, शहंशाह, स्वामी शिवदयाल आदि की तरह बाबा जयगुरुदेव जी भी मनुष्य शरीर में आये और सनातन विद्या के प्रचार के लिये विविध कार्यक्रम किये और काफिला यात्रायें निकाली। वे सच्चे राष्ट्र भक्त व समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, जीव हिंसा, मांसाहार, नशीले पदार्थों के सेवन व दहेज प्रथा आदि को छुड़ाकर अच्छे समाज व राष्ट्र निर्माण के लिये काम किया। जीवों के जागरण व आत्म कल्याण हेतु अन्तिम समय तक काफिला यात्रायें निकाल कर रूहानी, परमार्थी लाभ तथा अच्छे संस्कार डालने का कार्य करते रहें। बीस करोड़ से ऊपर जीवों को प्रभु प्राप्ति का रास्ता नामदान दिया। नशे का परित्याग और शाकाहार अपनाने को लोगों से अपील की और इसके प्रचार हेतु व्यापक अभियान चलवाया। वे कहते थे कि जो प्रभु प्राप्ति का रास्ता मिला हुआ है उसकी कमाई हर रोज करो। आलस्य करोगे तो मन मोटा हो जायेगा। उक्त विचार जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था व ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज जी महाराज ने पत्रकार वार्ता में व्यक्त किया। उन्होने बताया कि बाबा का जन्म उप्र के इटावा जिला मंे सेंगर नदी के किनारे खितौरा गाँव में हुआ। वहांँ पर बाबा की स्मृति में एक मन्दिर खितौरा कोठी निर्माणाधीन है। इनके माता पिता ने इनका नाम तुलसीदास रखा था। इनको अपने माता पिता का सानिध्य थोड़े ही दिन मिला था। माँ द्वारा कही गई बात को याद कर ये अल्पायु में घर छोड़कर प्रभु प्राप्ति के लिए निकल गये थे। गुरु की खोज में अलीगढ़ जिला के इग्लास तहसील के चिरौली गाँव में स्वामी घूरेलाल जी ने उन्हें प्रभु प्राप्ति का रास्ता बताया। बाबा ने सत्संग की शुरुआत सन् 1952 में वाराणसी से की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि सत्संग की यह धार जो अभी एक नाले के रूप में दिखाई दे रही है, आगे चलकर नहर, नदी से बढ़कर समुद्र का रूप ले लेगी। उनकी कही गई बातें शत् प्रतिशत सच हो रही हैं। अपने गुरु घूरेलाल जी की याद में जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर का निर्माण मथुरा में कराया जहां से निरन्तर बरकत बट रही है। उनका कहना था कि धर्म अनुकूल वातावरण में पनपता है। भारत विश्व गुरु बनेगा, इसके लिए परिवार, समाज और राष्ट्र की स्थिति ठीक होनी चाहिए। जिसका आधार धर्म होगा। जिसके लिए सन्तों का सत्संग एवं समागम आवश्यक है। द्वितीय भण्डारे को यादगार बनाने हेतु मेला परिसर को 41 सेक्टरों में विभाजित किया है। व्यवस्था सुचारू संचालित करने हेतु 35 विभाग बनाकर उसकी जिम्मेदारी लोगों को सौपी गई है। पूजन व प्रसाद वितरण 18 मई को रात्रिः 9.30 बजे, भण्डारा 19 मई, उसी दिन प्रातः 11 बजे से भोजन प्रसाद प्रारम्भ होगा। सत्संग नित्य प्रातः 5ः30 और सायं 5ः00 बजे, प्रार्थना, साधना प्रातः व सायं होगा। दहेज रहित विवाह सायंकाल 8ः00 बजे, कुछ जिलों के भण्डारे और शर्बत प्याऊ कैम्प प्रारम्भ हैं। वार्ता में मनुभाई पटेल उपाध्यक्ष, रामकृष्ण यादव महामन्त्री, डा0 केके मिश्रा कोषाध्यक्ष, विनय कुमार सिंह मन्त्री, चरन सिंह मेला प्रभारी, सन्तराम चैधरी मेला प्रबन्धक, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, सुनील यादव, प्रवक्ता डाॅ0 राज बहादुर चैधरी व अनिल ठाकुर, पीसी काले, आनन्द बहादुर सक्सेना, उदयराज सिंह, डीडी शुक्ला आदि उपस्थित रहे।


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