जर्द चेहरों के साथ सांझ गहराने का इंतजार शायद अब नहीं...

घिरती सांझ का अंधियारा, महिलाओं के कुछ झुंड घूंघट से मुँह ढके कुछ किशोरियों के साथ गांव की दहलीज से निकलकर तेजी से गांव से दूर खेतों की तरफ जा रही हैं, पास की सड़क किनारे कुछ महिलाएं बैठी हैं, जो सड़क पर वाहन की रोशनी पड़ते ही तेजी से उठकर पीछे की तरफ चल देती हैं। ये तमाम लड़कियां और महिलाएं, वो हैं जो शौच जाने के लिए पीले पड़ते जर्द चेहरों के साथ सांझ गहराने का इंतजार करती हैं ताकि शौच के लिए जा सकें, या सुबह होने से पहले अंधेरे में घर से बाहर खेतों में या जंगलों मे शौच के लिए चली जाती हैं। 


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