ठाकुर सेवा में भी मिलावट बढ़ी

ब्रज में नकली चंदन व धूपबत्ती की बिक्री जोरों पर

मथुरा। मिलावट का कार्य जोर शोर से चल रहा है। जिसकी ओर विभागों के लोग कोई ध्यान न देकर मिलावटी कार्यो को बढ़ावा दे रहे हैं। खाने की वस्तुओं के अलावा मिलावट ने ठाकुरजी की पूजा सामग्रियों को भी मिलावटी बना डाला है। हम आपको बता रहे है कि ठाकुरजी की पूजा में आने वाले लाल, पीले, सपफेद चंदनों के नाम पर लोगों को खडि़या, मुल्तानी मिट्टी एवं अरारोट पर कलर डालकर लाल रोली तथा पीले चंदन तरह-तरह के नामों से बाजार में बिक रहे है। जिन पर ये लिखा है कि यह शुद्ध चंदन केशर अस्ट गंध आदि युक्त हैै। जबकि इन डिब्बियों के चंदनों में खडि़या, मुल्तानी मिट्टी में गऊछाप रंग मिलाकर इन्हें पीला केशरिया कर दिया गया है। दानेदार चंदन हो या पाउडर का चंदन हो या चंदन टीका हो सभी ऐसी डिब्बियों के चंदन खडि़या मुल्तानी के अलावा कुछ नहीं है। 

ऐसे चंदनों की बिक्री बाजार में जोर शोर से चल रही है। बताया गया कि शहर में ठाकुरजी के सामानों की बिक्री कर रही दुकानों पर ऐसे चंदनों से बाजार अटा पड़ा है। जो कि पूर्णतः नकली चंदन कह दें तो अनुचित न होगा। हाथरस से आ रहा पीला रंगीन पाउडर यहां डिब्बियों में पैक करके विभिन्न नामों से बेचा जा रहा है। वृंदावन मथुरा में भी ऐसे चंदन बनाने वाले लगभग एक दर्जन लोग घरों में बैठकर इस कारोबार को अंजाम दे रहे है। इन चंदन बनाने वालों पर कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। इन नकली चंदनों को शहर की दो बड़ी फर्मे समूचे देश यहां तक विदेशों में भी भेज रही है। यही हाल पूजा में काम आने वाली धूप बत्तियों का है। ये धूप बत्तियां टायर व क्रूड से मिलाकर खुशबू लगाकर बाजार में बेची जा रही है। दर्जनों लोग ऐसी नकली बेकार धूपों को बेच रहे हैं। ऐसी ही बेकार वस्तुओं पर बनाई अगरबत्तियां भी शहर में बेची जा रही है। जिनके जलाने से वातावरण में काला धुंआ कार्बन घरों में जमा हो रहा है।


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