
भोलेश्वर उपमन्यु
मथुरा। महंगाई का बढ़ता ग्राफ का प्रभाव सरकारी योजनाओं पर भी पड़ गया है।
इसका ताजा उदाहरण मुडिया मेले की व्यवस्थाओं के लिये जिला प्रशासन द्वारा
शासन से बीते साल की तुलना तीन गुना अधिक बजट की मांग करने के रूप में
मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि डीएम की आक्रामक कार्यप्रणाली तथा
गोवरधन के हालात के चलते इस बार शासन उदारतापूर्वक धनराशि मंजूर करेगा और
श्रद्धालुओं की बेहतर सेवा करना आसान हो सकेगा।
गुरु पूर्णिमा के दिन गोवरधन धाम में लक्खी मेला लगता है। गिरिराज प्रभु
की परिक्रमा करने के लिये सैलाव उमड़ता है। भक्तों की संख्या इतनी अधिक
होती है कि प्रशासनिक व्यवस्थाएं नकारा साबित होती हैं। श्रद्धालुओं की
संख्या का आंकलन करने में अलग-अलग गणित सामने आते हैं। बीते साल भीड़ की
आंकलन किसी ने पचास लाख, किसी ने साठ-सत्तर लाख तो किसी एक करोड़ किया था।
अपने-अपने दावों के साथ के खबरें भी प्रसारित एवं प्रकाशित हुईं। बीते
सालों की समीक्षा भी गंभीरता से की गई। नई जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने इस
जनपद की जिम्मेदारी संभाली तो मेले के लिये भी गंभीर रुख अपनाया। डीएम ने
गोवरधन जाकर निरीक्षण किया और संबंधित विभागों को जरूरी दिर्नेश दिये।
दूसरी ओर अतिक्रमणकारियों को भी सख्ती की चेतावनी दी। उन्होंने बीते साल
की शासन को भेजे गये 1.31 करोड़ बजट की मांग में बढ़ोत्तरी करते हुये इस
बार तीन करोड़ का प्रस्ताव लखनऊ को भेजा। इसे एक ओर महंगाई से जोड़कर देखा
गया तो दूसरी तरफ बीते साल 1.31 करोड़ के प्रस्ताव के बाद महज 52.89 लाख
रुपये की प्राप्ति होने से जोड़ा गया। कहा और माना यह भी माना जा रहा है
कि बजट इसलिये भी अधिक मांगा गया है कि लखनऊ से लगभग आधा तो मिल ही
जाएगा। मौजूदा परिवर्तनों के मद्देनजर तथा जिलाधिकारी की सक्रियता,
त्वरित कदम उठाने के चलते उम्मीद की जा रही है कि शासन इस बार गोवरधन की
दुर्दशा और भीड़ का महत्व समझकर बजट की मांग पर उदारतापूर्वक फैसला लेगा।





