नबाब सिंह के नबाबी किस्सों की जांच करेंगे क्षेत्राधिकारी सदर अनिल कुमार यादव
गोवर्धन। नबाबों के शहर के नाम से मशहूर सूबे की राजधानी लखनऊ जैसे शहरों मंे भले ही नबाबों की नबाबी चली गयी है लेकिन यहां थाना गोवर्धन में तैनात एक हैड मोहर्रर नबाब सिंह अपने नाम के अनुरूप हर किसी पर अपनी नबाबी झाड़ते मिले है। थाने में आने वाला फरियादी हो या अन्य कोई भी व्यक्ति या अपना खुद का मातहत भी इनकी तो बात छोडि़ये वे अपने उच्चाधिकारी को भी अपनी नबाबी का शिकार बनाने से नहीं चूकते। ये वाकया जब मीडिया तक पहुंचा तो मीडियाकर्मी भी नबाब सिंह की नबाबी के शिकार होने से नहीं बच सके। मामला यहां तक बढ़ गया कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने तत्काल प्रभाव से नबाब सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही उनकी नबाबी जांचने के लिये जांच भी बिठानी पड़ी। फिलहाल नबाबी के इस अनोखे मामले की जांच चल रही है।
दरअसल मामला मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शुमार महिला उत्पीड़न व महिला सुरक्षा के मामलों को दबाने के प्रयासो से जुड़ा है। साथ ही थाना प्रभारी के कार्यवाही के आदेशों को ठेंगा दिखाने का भी है। यहां तैनात हैड माहर्रर नबाब सिंह ने अपनी नबाबी के आगे हर किसी को बौना साबित कर दिया है।
एक ओर जहां सरकार महिलाओं की सुरक्षा की दुहाई देती है वहीं थाना गोवर्धन की पुलिस का महिलाओं के खिलाफ अभद्रता करने का इकबालिया बुलन्द है। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा पुलिस वालों को चाहे जितनी भी हिदायत दी जाये। किन्तु वह सब कुछ दरकिनार कर अपनी फितरत के अनुसार ही कार्य करने के आदी हो चुके हैं। थाना गोवर्धन में तो लगता है कि पुलिसकर्मी हों या दीवान सभी उच्च अधिकारियों के आदेशों को हवा में उडाकर निरंकुश हो चुके हैं। यहां अब पीडित को न्याय मिल पाना आसान नहीं रह गया। थाने में तैनात दीवान की हनक पुलिसकर्मियों सहित थाना प्रभारी पर भी भारी पड रही है। थाना प्रभारी के आदेश के बाबजूद भी न्याय के लिए थाने के चक्कर लगा रहे फरियादी की रिपोर्ट दर्ज करने के आदेशों को धता बताकर थाने के दीवान ही फरियादी को भला बुरा कहते हुए भगा देते हैं। प्रकरण की जानकारी होने पर थाना प्रभारी का दीवान से पूछना भी भारी पड जाता है। इतना ही दीवान आवेश में आकर अपने ही अधिकारी के सम्मान को दरकिनार कर जब शुरू होते हैं तो रूकने का नाम नहीं लेते हैं।
ये घटनाक्रम विगत रविवार का है। कस्बे के महल हंसारानी निवासी विकलांग युवक आनन्द पुत्र गंगा प्रसाद की पत्नी विगत 26 फरवरी से लापता है। अपनी पत्नि तीन बच्चों की मंा के दबंगों के साथ जाने की जानकारी लगने पर फरियादी आनन्द गत एक माह से नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर काटता है। रविवार सुवह थाना प्रभारी सूर्यभान सिंह से मिलकर पीडित आनन्द ने अपनी कहानी बताई। तो थाना प्रभारी स्वयं उसे लेकर तहरीर सहित कार्यालय में पहुंचकर उसकी रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश देते हुए आवश्यक कार्य से निकल गये। आरोप है कि दीवान के अनुसार आनन्द द्वारा तहरीर ना लिखे जाने से आक्रोशित दीवान ने उसे थाने से भगा दिया। प्रकरण की जानकारी थाना प्रभारी को मिलने पर देर सांय थाना कार्यालय में उपस्थित दीवान नवाव सिंह से थाना प्रभारी सूर्यभान सिंह ने रिपोर्ट दर्ज ना करने बावत पूछा तो बस दीवान आपा खो बैठे। उन्हें जो मन में आया वही बोलने लगे। दीवान ने अपना ट्रांसफर करा देने सहित बहुत कुछ कह दिया। दीवान के आवेश को देखकर थाना प्रभारी सहित पुलिसकर्मी व मौके पर उपस्थित सभी लागों को कार्यालय छोडना पडा। साथ ही फरियादी को रिपोर्ट दर्ज करने हेतु सुवह आने की बात कही गई। पीडित विकलांग फरियादी आनन्द ने बताया कि उस पर तहरीर बदलकर देने के लिए दबाब डाला जा रहा है। थाने में तैनात दीवान का यह पहला मामला नहीं है। वह फरियादियों ही नहीं महिलाओं के साथ भी वे ऐसा ही बर्ताव करते हैं। विगत दिनों थाने में प्रतिदिन की तरह डाक रिसीव कराने पहुंची महिला डाकिया के साथ भी दीवान द्वारा अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है। महिला डाकिया का आरोप है कि 13 मार्च को जब वह थाना आफिस में डाक लेकर पहुची तो दीवान जी ने डाक रिसीव करने से मना करते हुए डाक फैक दी एवं उसको जमकर भला बुरा कहा। जिसकी उन्होंने मौखिक शिकायत थाना प्रभारी से की। थाना प्रभारी से बात करने की कोशिश की तो फोन पर वार्ता नहीं हो सकी। ये वाकया जब मीडिया तक पहुंचा तो नबाब सिंह ने मीडियाकर्मियों को भी जमकर भली बुरी सुनाई। वहीं जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से नबाब सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही उनकी नबाबी जांचने के लिये क्षेत्राधिकारी सदर अनिल कुमार यादव को मामले की जांच सौंपी है।





