बलदेव। साबन के महिने में झूला झूलने की परम्परा पहले की अपेक्षा कम होती जा रही है। पर देवालयों में देवताओं को आज भी झूला झुलाया जाता है। बर्षो से दाऊजी मंदिर में हिंडोला उत्सब की अनूठी परंपरा यथावत कायम है। श्रावण मास की बात ही निराली है। कोयल की मीठी कूक, मोर का नृत्य, पूरे बेग से बहती यमुना मन को आन्नदित कर देती है। बृज मण्डल में बृज के राजा ठा0 श्री दाऊजी महाराज के मंदिर में हिंडोला उत्सव की झांकिया भक्तों को प्रेम संदेश प्रदान करती है। भगवान श्री कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलदाऊ महाराज जिन्हें श्रंद्वालु प्रेमबस दाऊजी कहते है। झूलात्सब की बात ही निराली है। सावन मास में एकादशी से रक्षाबन्ध्न तक लाला ठाकुर के स्वरूप को हिंडोला में झुलाकर परंपरा का निर्बहन किया जाता है। बलदेव जी मंदिर में हिंडोला उत्सब की अनूठी परंपरा है। दाऊजी महाराज का विशाल व अत्यन्त मनोहारी बिग्रह लगभग आठ फुट ऊंचा , साढें तीन फुट चैडा है। दाऊजी महाराज के विशाल विग्रह पर सात नाग भी है। विशाल विग्रह को झूलें पर झुलाना असंभव है। ऐसे में दाऊजी के विग्रह के ठीक सामने स्थित प्रांगण में हिंडोला स्थापित किया जाता है। लगभग 15 फुट ऊंचे हिंडोले मंे ठा0 श्री दाऊजी महाराज को उनके स्वर्ण जडित दर्पण के माध्यम से झूला झुलाया जाता है। आरती के पश्चात उनके मुकुट व मुरली को हिडोले में रखकर झूला झूलाते है। जिसमें ठा0 श्री दाऊजी महाराज की छवि दिखाई देती है। स्थानीय युवा समाज सेवी सुजीत वर्मा व अनुज उपमन्यु ने जिलाध्किारी से साबन मास के चलते दाऊजी महाराज के दर्शनार्थ आने बाले श्रंद्वालुओं की सुबिध को ध्यान में रखते हुए परिबहन ,पेयजल, बिघुत व चिकित्सा की उचित व्यवस्थाऐं किए जाने की मांग की है।





