दीपा ने पैरेलाइज्ड महिलाओं को समर्पित किया रजत

दीपा ने पैरेलाइज्ड महिलाओं को समर्पित किया रजतरियो डी जनेरियो । ब्राजील की मेजबानी में खेले जा रहे पैरालम्पिक खेलों में भारत की दीपा मलिक ने गोलाफेंक एफ53 स्पर्धा के फाइनल में रजत पदक अपने नाम किया है। इसके साथ ही वह पैरालम्पिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि पैरेलाइज्ड होने के बावजूद भी दीपा ने हिम्मत नहीं हारीं और नया इतिहास रच डाला। दीपा ने यहां 4.61 मीटर की दूरी तय कर रजत पदक पर कब्जा जमाया। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। आपको बता दें कि 30 सितंबर 1970 को हरियाणा के सोनीपत में जन्मीं दीपा मलिक को 17 साल पहले 29 की उम्र में लकवा मार गया। 

 

उनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा पैरेलाइज्ड है। इस बीमारी की शुरुआत में पहले उनकी टांगों में कमजोरी की शिकायत आई थी। बाद में पता चला कि उनके स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर है। इसके बाद उनका ऑपरेशन हुआ, लेकिन 1999 में दोबारा परेशानी महसूस होने के बाद उनका दूसरा ऑपरेशन हुआ। इसके बाद तीसरी सर्जरी हुई और उनकी स्पाइनल कॉर्ड डैमेज हो गई। अब वे व्हील चेयर के सहारे जिंदगी जीती हैं। लेकिन शॉटपुट की बेहतरीन एथलीट हैं।

 

रजत भारत की विकलांग महिलाओं को समर्पित

दीपा मलिक का कहना है कि वह इस पदक का इस्तेमाल भारत में विकलांग महिलाओं को समर्थन देने में करेंगी। भारत के पैरालम्पिक दल की सबसे उम्रदराज खिलाड़ी ने कहा है कि पदक जीतने उनके और उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है। दीपा ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मैं इस पदक का इस्तेमाल भारत की विकलांग महिलाओं की मदद करने के लिए करूंगी। यहां तक का सफर मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी शानदार रहा है। मैं टीम की सबसे उम्रदराज खिलाड़ी और पदक विजेता बन कर खुश हूं।’’

 

ये है उपलब्धियों का सफर 

45 वर्षीय दीपा दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। 2008 में उन्होंने यमुना नदी को एक कीलोमीटर तैर कर पार कर रिकार्ड बुक में नाम दर्ज करवाया था। वहीं दूसरी बार 2013 में 58 किलोमीटर तक विशेष मोटरसाइकिल चला कर इस किताब में नाम दर्ज करवाया था। दीपा 2012 में अर्जुन अवार्ड भी अपने नाम कर चुकी हैं। वह आर्मी अधिकारी की पत्नी होने के साथ-साथ दो बच्चों की मां भी हैं।                 

साभार-khaskhabar.com

 


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