
-प्रदूषण विभाग ने चेताए मानसी गंगा,
जतीपुरा एवं दानघाटी मंदिरों के प्रबंधक
भोलेश्वर उपमन्यु
मथुरा। दूध में घातक वैक्टिरिया होता है। एक लीटर दूध एक करोड़ लीटर पानी
को प्रदूषित करने की क्षमता रखता है। अगर सिंथेटिक दूध की धार चढ़ाना बंद
नहीं हुआ तो संभव है कि भगवान भी बीमार हो जाएं। इसकी संभावना इसलिये भी
बढ़ी है कि इन दिनों पुरी से लेकर मथुरा-वृंदावन तक के जगन्नाथ बीमार हैं
और उन्हें परंपरागत रूप से दवाएं दी जा रही हैं।
ब्रज के प्रसिद्ध मुडिया पूर्णिमा मेले में एक करोड़ श्रद्धालु आते हैं।
इसकी बेहतर व्यवस्थाओं के लिये जिला प्रशासन न सिर्फ सजग है, बल्कि डीएम
गोवरधन का दौरा भी कर चुकी हैं। मैराथन मीटिगों के दौर भी चल निगले हैं।
डीएम ने इस बार बीते साल के 1.31 करोड़ से अधिक तीन करोड़ बजट की मांग शासन
से की है। लेकिन एक ओर गिरिराज धाम में अभी अव्यवस्थाएं सिर चढ़कर बोल रही
हैं, बल्कि प्रदूषण को भी बोलबाला है। मानसी गंगा का जल शुद्ध नहीं कहा
जा रहा है। मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने की दिशा में कदम नहीं उठाए जा रहे
हैं। सिंथेटिक दूध का कारोबार सरेआम हो रहा है। समय रहते प्रशासन नहीं
चेता तो निश्चित है कि कानून का एक बार फिर मजाक उड़ेगा। श्रद्धालुओं के
साथ भगवान भी संकट में पड़ सकते हैं।
राधा कृष्ण के ब्रज में दूध की नदियां बहने की कहावत विश्वभर में
प्रसिद्ध है। अकेले कृष्ण के पालक पिता नंदबाबा के पास नौ लाख गाएं थीं।
राधा के पिता वृषभान की उपाधित से विभूषित थे और उनकी गायों की संख्या भी
लाखों में थी। कान्हा ने गाय का महत्व प्रमाणित करते हुये स्वयं ने
ब्रजराज दाऊजी के साथ गौपूजा की। गौचारण स्वयं किया। लेकिन आज हालात यह
हैं कि भगवान के ब्रज में सिंथेटिक दूध की भरमार है। इसकी जांच रिपोर्टें
तथा मानव जीवन के लिये भयंकर खतरे की खबरें बार-बार सुर्खियां पाईं हैं,
लेकिन मिलावट पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
इस संबंध में प्रदूषण विभाग के डा. अरविंद कुमार बताते हैं कि सिंथेटिक
दूध अत्यंत घातक है। एक किलो लीटर दूध एक करोड़ किलो लीटर शुद्ध जल को
प्रदूषित करने की क्षमता रखता है। इससे चढ़ाने से भगवान के विग्रह पर भी
विपरीत असर पढ़ता है। भगवान पर चढ़ाया गया दूध जब आम रास्ते में या नाली
में बहता है तो दुर्गंध भी फैलाता है। इस दुर्गंध से दूध के घातक
वैक्टिरिया भक्तों पर भी खतरनाक असर डालते हैं। देखने में आता है कि आम
रास्तों में कीचड़ हो जाती है। श्रद्धालु फिसलते भी हैं। दुर्घटनाएं घटती
हैं।
-पानी को बनाता जहर-
डा. अरविंद कहते हैं कि दूध को मानसी गंगा में भी चढ़ाने की परंपरा है। जब
इसी परंपरा का पालन करते हुये सिंथेटिक दूध चढ़या जाता है तो पानी में
मौजूद आक्शीजन नष्ट हो जाती है और बीमारी के वेक्टिरिया जन्म ले लेते
हैं। उन्होंने कहा कि जो भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिये दूध चढ़ाते
हैं उन्हें यह भी जानना चाहिए कि वैक्टिरिया अराध्य को भी नुकसान पहुंचा
सकते हैं। ऐसी स्थिति में जिन भगवान को खुश करने और पुण्य अर्जित करने का
प्रयास किया जाता है, संभव कि वही अप्रसन्न हों। उनका कहना है कि ऐसे
भक्त भगवान का भी स्वास्थ्य खराब करते हैं।
-मंदिर संग मानसी गंगा प्रबंधक रोकें प्रदूषण-
डा. अरविंद ने बताया कि विभाग ने मानसी गंगा, दानघाटी एवं जतीपुरा मंदिर
की प्रबंध समितियों को पत्र दिखकर दूध नहीं चढ़ावाने के लिये आग्रह किया
है। पूजा सामग्री भी गंगा में प्रवाहित करने से रोकने के लिये कहा है।
उन्होंने तर्क दिया कि मानसी गंगा का जल चलता हुआ नहीं और ठहरा हुआ है और
ऐसे जल में पूजा सामग्री चढ़ाना भी प्रदूषण बढ़ता है। उनका कहना है कि मई
महीने में लिया गया मानसी गंगा जल का सैंपिल संतोषजनक है, लेकिन अगर
इसमें सिंथेटिक दूध, पूजा सामग्री चढ़ाई गई तो फिर प्रदूषण अवश्य बढ़ेगा।
स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर चल रहे प्रदूषण अधिकारी केपी सिंह ने
दूरभाष पर बताया कि उनकी टीम महीने में दो बार मानसी गंगा के जल का
सैंपिल लेती है। जांच रिपोर्ट में प्रदूषण के वैक्टिरिया घटते भी हैं,
लेकिन बढ़ने की रपटें अधिक आती हैं।
-ऐसे खुश होंगे भगवान-
डा. अरविंद कुमार सलाह देते हैं कि जिन भक्तों को भगवान को खुश करना है
वह घर में गाय पालें। गाय को शुद्ध चारा खिलाएं, शुद्ध जल पिलाएं और उसके
दूध को बछड़े को भी पिलाते रहें, इसके बाद भगवान पर चढ़ाएं। डा. अरविंद की
भगवान के बीमार होने संबंधी बयान को भले कोई व्यंग्य समझे, लेकिन उसमें
सच्चाई है। वह इसलिये की पुरी में जगन्नाथ बन विराजे कृष्ण, बलराम एवं
उनकी बहिन सुभद्रा की रविवार को रथयात्रा निकलनी है और उससे पहले उन्हें
जड़ी-बूटियों से बना काड़ा दिया जा रहा है। इस संबंध में समाचार भी प्रिंट
एवं इलैक्ट्रानिक मीडिया में बराबर आ रहे हैं।





