लखनऊ। मथुरा में हुई हिंसा के जिम्मेदार रामवृक्ष यादव के मारे जाने की खबर आ रही है। सीएम कार्यालय के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जिस हिंसा में 24 लोगों की मौत हुई थी, उसमें रामवृक्ष के भी मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अखिलेश सरकार आज इस खबर की अधिकारिक पुष्टि कर सकती है। हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की राजधानी से 160 किलोमीटर दूर मथुरा में गुरुवार को हुई हिंसा पर एक रपट मांगी है।
अखिलेश यादव ने संवाददाताओं से कहा, यह एक गंभीर मामला है, जिसकी आयुक्त स्तरीय जांच होगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। मथुरा में गुरुवार शाम जवाहरबाग में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस और अक्रिमणकारियों के बीच हुई झड़प में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। 23 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। झड़प में शामिल 250 लोगों को हिरासत में लिया गया है। शहर में तनाव पसरा है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि मामले से निपटने में चूक हुई है।
उन्होंने कहा, अतिक्रमणकारियों से बातचीत के कई बार प्रयास किए गए, उन्हें चेतावनी दी गई, लेकिन जमीन खाली नहीं किया गया। इसमें चूक भी हुई है। गलती यह रही कि पुलिस वहां पूरी तैयारी के साथ नहीं गई। इसमें कई तरह के खतरे शामिल थे। किसी को नहीं पता था कि वहां कितना विस्फोटक है। इससे पहले, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा में खूनी खेल खेलनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, उत्तर प्रदेश सरकार मथुरा में हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। आरोपियों की त्वरित सुनवाई होगी। यादव ने जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों के परिजनों को सहयोग देने का वादा भी किया। उन्होंने ट्वीट किया, इन बहादुरों के परिजनों को मेरी तरफ से गहरी संवेदनाएं। मेरी सरकार उनके परिजनों को हर तरह का सहयोग सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने दोनों पुलिस अधिकारियों के परिजनों को अनुग्रह राशि के रूप में 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा की।
इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मथुरा में हालात का जायजा लिया और राज्य सरकार को सभी तरह की मदद का आश्वासन दिया। सिंह ने ट्वीट किया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात हुई और मथुरा में हालात का जायजा लिया। मैंने उन्हें केंद्र से हर तरह की मदद का भरोसा दिया। वहीं, भाजपा ने जोर देते हुए कहा कि मथुरा में हिंसा उत्तर प्रदेश में ध्वस्त कानून-व्यवस्था का जीता जागता सबूत है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मथुरा केवल एक छोटा सा शहर नहीं है। यह क्षेत्र का एक केंद्र है, जहां भारी मात्रा में हथियार तथा विस्फोटकों को इक_ा किया गया। स्थानीय प्रशासन को कैसे इसकी भनक नहीं लगी? इस तरह की गलती कैसे हो सकती है। भाजपा सचिव श्रीकांत शर्मा ने स्थिति नियंत्रण से बाहर जाने देने के लिए अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। शहर के जवाहरबाग क्षेत्र में हुई घटना के बाद से शर्मा मथुरा में हैं।
शर्मा ने आईएएनएस से कहा, ये समाजवादी पार्टी के बदमाश थे, जिन्होंने तीन साल पहले जवाहरबाग इलाके में अतिक्रमण किया था और पुलिस को कार्रवाई की छूट नहीं दी गई थी। यह बिल्कुल लापरवाही का मामला है। शर्मा ने कहा, हम इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं। इससे पहले, शर्मा ने इस मामले की न्यायिक जांच का मांग की थी। शर्मा स्वयं मथुरा के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के गठन के बाद से ऐसी 900 घटनाएं हुई हैं, जिनमें पुलिस को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। पहले आजमगढ़ और प्रतापगढ़ में भी इस तरह की घटनाएं हुई थीं। शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में महाजंगलराज है, जहां बदमाश पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी करने से नहीं हिचकते हैं। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है।
साभार-khaskhabar.com






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