धनतेरस की पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

धनतेरस की पूजन विधि और शुभ मुहूर्तधनतेरस सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व माना जाता है। धनतेरस पूजा को ‘धनत्रयोदशी’ के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। पुराणों में लिखी कथा के अनुसार, देवताओं व दैत्यों ने जब समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई रत्न निकले। समुद्र मंथन के अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उस दिन कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी ही थी। इसलिए तब से इस तिथि को भगवान धन्वंतरि का प्रकटोत्सव मनाए जाने का चलन प्रारंभ हुआ। पुराणों में धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना गया है। 

धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान धन्वन्तरि को आपने प्रसन्न कर दिया तो आपके घर में सुख-समृद्धि तो आएगी ही, साथ ही आपके परिवार का हर सदस्य स्वस्थ भी रहेगा। वैसे भी अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। इस दिन पूजा का भी विशेष महत्व है।

धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त-

धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त शुक्रवार शाम 5:33 बजे से 6:20 बजे तक है। इस मुर्हूत में पूजा-अर्चना करने से स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। प्रदोष काल का मुहूर्त शाम 5:35 बजे से रात 8:11 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। इस मुहूर्त में पूजा करना बहुत शुभ रहता है। वृषभ काल का मुहूर्त शाम 6:35 बजे से 8:30 बजे तक रहेगा।

धनतेरस की पूजन विधि--

सबसे पहले नहाकर साफ वस्त्र पहनें। भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र साफ स्थान पर स्थापित करें तथा स्वयं पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। उसके बाद भगवान धन्वंतरि का आह्वान इस मंत्र से करें-

सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,

अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।

गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

इसके बाद पूजा स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढाएं। आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान धन्वंतरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं। चांदी के बर्तन में खीर का भोग लगाएं। (अगर चांदी का बर्तन न हो तो अन्य किसी बर्तन में भी भोग लगा सकते हैं।) इसके बाद पुन: आचमन के लिए जल छोड़े। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। भगवान धन्वंतरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वंतरि को अर्पित करें। रोग नाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-

ऊँ रं रुद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।।

इसके बाद भगवान धन्वंतरि को श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाएं। पूजा के अंत में कर्पूर आरती करें।

      

साभार-khaskhabar.com

 


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