धर्म नगरी बनी अपराधियों की शरण स्थली

अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहे हैं जनपद में अपराध

राजेश टोंटा की पत्नी कनक शर्मा ने लगाया आरोप

मथुरा। मथुरा को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है लेकिन अब यह नगर भी अपराधियों की शरण स्थली के साथ साथ अपराध करने के लिये मुफीद जगह बन गई है। अपराधों की वात करें तो हाल के कुछ महिनों में जनपद में अपराधों के ग्राफ में बेतहासा वृद्धि देखी जा रही है। हो भी क्यों न मथुरा जनपद के मामले में यह कहावत सटीक बैठती है कि ‘‘जब दारोगा महरवान तो पटठा पहलवान’’ जनपद के आलाधिकारी से लेकर थाने चैकी तक के सिपाहियों तक से अपराधी साठगांठ करके अपने काम को अंजाम देने में लगे हैं। इसका अन्दाजा इसी वात से लगाया जा सकता है जब एक अपराधी की पत्नी ने ही जिले की आलाधिकारी पर अपने पति की हत्या किये जाने का गम्भीर आरोप लगा दिया है। उसने बाकायदा एसएसपी पर हत्या किये जाने के लिये 3 करोड़ रुपये लिये जाने का आरोप भी लगाया है।

राजेश टोंटा के नाम से कुख्यात रहे हाथरस निवासी राजेश शर्मा की पत्नी कनक शर्मा ने अपने पति की हत्या का आरोप मथुरा की महिला एसएसपी मंजिल सैनी पर लगाया है। कनक शर्मा ने इस मामले में बाकायदा मथुरा के थाना फरह को इस आशय की तहरीर दी है। तहरीर के मुताबिक राजेश टोंटा की हत्या का सौदा एसएसपी मंजिल सैनी ने 3 करोड़ की मोटी रकम लेकर किया था।

गौरतलब है कि राजेश टोंटा अपने साथी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खौफ का पर्याय रहे ब्रजेश मावी की हत्या के आरोप में मथुरा जिला जेल के अंदर निरुद्ध था। जेल के अंदर ही 17 जनवरी को हुई फायरिंग में राजेश टोंटा व उसका एक साथी राजकुमार शर्मा घायल हो गये जबकि एक अन्य बदमाश अक्षय सोलंकी जेल में ही मारा गया था। पुलिस के अनुसार जेल के अंदर हुई यह गोलीबारी दरअसल एक गैंगवार थी और इसे राजेश टोंटा व ब्रजेश मावी गैंग के अक्षय सोलंकी तथा दीपक वर्मा व दीपक राणा आदि ने घटना को अंजाम दिया।

जेल के अंदर हुई गोलीबारी में घायल राजेश टोंटा को जिला अस्पताल लाया गया और उसके साथी राजकुमार शर्मा को मथुरा के ही अग्रवाल लाइफ लाइन हॉस्पीटल में एडमिट कराया गया था। चूंकि राजेश टोंटा के पैर में गोली लगी थी इसलिए उसकी हालत डाक्टरों द्वारा खतरे से बाहर बताई गई थी।

जेल के अंदर हुई इस कथित गैंगवार में नया मोड़ तब आया जब उसी दिन रात करीब 11 बजे घने कोहरे के बीच एक एंबुलेंस द्वारा राजेश टोंटा को उपचार लिये मथुरा पुलिस आगरा ले जाने लगी और उसके आगरा पहुंचने से पूर्व मथुरा के फरह थाना क्षेत्र में महुअन टोल प्लाजा के निकट एंबुलेंस के अंदर ही गोलियां मारकर कर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार राजेश टोंटा पर मंडरा रहे खतरे को भांपकर एंबुलेंस से लेकर सड़क तक उसकी सुरक्षा का भारी बंदोबस्त भी किया था किंतु कोहरे का लाभ उठाकर मावी गैंग के सदस्य राजेश टोंटा का काम तमाम करने में सफल हो गये।

पुलिस ने इस मामले में ब्रजेश मावी के एक साथी गोपाल यादव तथा एक बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता को दो दिन के अंदर ही गिरफ्तार कर न सिर्फ जेल में हुई कथित गैंगवार का पर्दाफाश कर दिया बल्कि नेशनल हाईवे पर पुलिस अभिरक्षा में हुई राजेश टोंटा की हत्या का भी खुलासा कर दिया। तत्कालीन आईजी जोन आगरा सुनील गुप्ता, डीआईजी आगरा लक्ष्मी सिंह की मौजूदगी में एसएसपी मथुरा मंजिल सैनी ने इस पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा पत्रकारों को दिया और खुलासा करने वाली टीम के लिए आईजी की ओर से 50 हजार रुपए के भारी-भरकम ईनाम की घोषणा भी की गई। पुलिस के अनुसार पूरे घटनाक्रम का सूत्रधार मथुरा के ही पानी गांव का निवासी तथा ब्रजेश मावी का साथी अजय चैधरी उर्फ राकेश चैधरी है जो टोंटा गैंग से मावी की हत्या का बदला लेना चाहता था। मावी के दूसरे साथी गोपाल यादव ने अजय उर्फ राकेश चैधरी के साथ रहकर मास्टर माइंड की भूमिका निभाई और जेल के अंदर बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता के हाथों हथियार एवं पैसा भेजने का इंतजाम किया। पुलिस की कहानी के मुताबिक राजेश टोंटा की जेल में हत्या न हो पाने की जानकारी मिलने के बाद आनन-फानन में इन्हीं लोगों ने उसे पुलिस अभिरक्षा में तब ठिकाने लगाने का प्लान बनाया जब उसे उपचार के लिए आगरा ले जाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार राजेश की हत्या करने में भी यह दोनों लोग शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि मथुरा निवासी गोपाल यादव और प्रमोद चैधरी, ब्रजेश मावी की हत्या के चश्मदीद गवाह हैं। हालांकि मावी का शव आज तक पुलिस बरामद करने में असफल रही है। बताया जाता है कि मावी के साथ ही गोपाल और प्रमोद मथुरा से हाथरस गये थे जहां राजेश टोंटा ने अपने घर के अंदर मावी की धोखे से हत्या कर दी। मावी की हत्या किये जाने का समाचार गोपाल तथा प्रमोद ने ही सबसे पहले मथुरा पुलिस को दिया था और उसके बाद मथुरा पुलिस एक लंबे समय तक गोपाल व प्रमोद को साथ लेकर घूमती रही ताकि मावी के कत्ल की पुष्टि की जा सके किंतु वह उसकी हत्या किये जाने का कोई ठोस सबूत नहीं जुटा सकी।

पुलिस की इस कहानी के इतर राजेश टोंटा की पत्नी कनक शर्मा पहले दिन से यह कहती रही है कि उसके पति की हत्या मथुरा पुलिस ने कराई है। कनक शर्मा ने अब फरह पुलिस को दी तहरीर में मथुरा की एसएसपी मंजिल सैनी पर अपने पति की हत्या का 3 करोड़ रुपये लेकर सौदा करने जैसा सनसनीखेज आरोप लगाया है।

कनक शर्मा की मानें तो एसएसपी मंजिल सैनी ने खुद उनके सामने उनके पति के बच जाने पर आश्चर्य प्रकट किया था और फिर उनकी हत्या का षड्यंत्र रचने लगीं। वह साये की तरह अस्पताल में भी मौजूद थीं और मुझे भी पति से मिलने से रोकती रहीं।

कनक शर्मा का आरोप है कि एसएसपी की ही योजना थी जिसके चलते मेरे पति को बिना किसी कारण रात 11 बजे उपचार के नाम पर ले जाया गया। मेरे साथ अभद्रता की। हमारी गाडि़यों को पंक्चर कर दिया गया और हमारे कई सगे-संबधियों को अवैध रूप से हिरासत में लेकर बाद में उनका झूठे आरोपों में चालान तक कर दिया। कनक शर्मा द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक रात्रि 11.30 बजे एंबुलेंस को हाइवे पर महुअन टोल से पहले रोक दिया गया। करीब पांच मिनट बाद एंबुलेंस का गेट खोलकर दो पुलिस वर्दीधारी और चार अज्ञात लोगों जिनके मुंह ढके हुए थे उन्होंने ही अपने हथियारों से राजेश पर गोलियां चला दीं। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कनक शर्मा का आरोप है कि काफी देर बाद महिला दारोगा विपिन चैधरी उसे गाली-गलौज देते हुए मारपीट कर महिला थाना मथुरा ले गई और बार-बार कहने पर भी घर वालों से उसकी बात नहीं कराई। उसे यह धमकी दी गई कि यदि उसने राजेश टोंटा की हत्या को लेकर पुलिस के खिलाफ बयान दिया तो उसे और उसके इकलौते बेटे को भी मरवा दिया जायेगा। कनक का कहना है कि पुलिस ने अगले दिन करीब 11 बजे उसे थाने से जाने दिया। कनक शर्मा ने इस तहरीर की प्रतियां चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट, चीफ जस्टिस इलाहाबाद हाईकोर्ट, प्रदेश के राज्यपाल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, आईजी जोन आगरा, डीआईजी रेंज आगरा को भी प्रेषित की हैं।

योजना के अनुसार ही की गई टौंटा की हत्या

राजेश टौंटा को घायल कर बाहर लाने की योजना पहले से ही बनाई जा चुकी थी। इसके लिये हथियारों को जेल के अन्दर पहुंचाये गये। बीच में आये अक्षय सौलंकी की हत्या जेल में ही हो गयी थी बीच में जो भी आया वह घायल हो गया। योजना सफल रही और राजेश टौंटा के पैर में गोली लगी। हत्या तो जिला अस्पताल में भी हो सकती थी क्यों कि भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में राजेश टौंटा को बार्ड में स्फिट किया गया था। साथ चल रहे पुलिस कर्मी भी उस समय कुछ होने की आशंका व्यक्त कर रहे थे। फिर योजना के अनुसार राजेश टौंटा जो कि डाक्टरों द्वारा खतरे से बाहर बताया जा रहा था। तो फिर पुलिस ने उसे आगरा क्यों रेफर किया वह भी देर रात्रि में एम्बुलेन्स में आगरा ले जाते समय महुअन टोल बेरियर के निकट ही एम्बूलेन्स रोक कर बदमाश उसमें दाखिल हुए और तावडतोड गोलिया मारी गयीं जिसमें राजेश टौंटा की मौंके पर मौत हो गई। इस घटना में किसी पुलिसकर्मी के घायल होने व एम्बुलेन्स में चल रहे किसी भी स्वस्थ्य कर्मी के घायल होने की पुष्टि नही हुई। जेल से लेकर राजेश टौंटा की हत्या की दोनों घटनाओं में अनेक प्रश्न हैं जिनसे ऐसा लगता है कि कही न कही पुलिस की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।

 


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