पुलिस की सैटिंग-गैटिंग से चलता है शहर में पनपता सट्टा कारोबार

पुलिस को मिलता है लाखो रूपया माहवार

नवागत क्षेत्राधिकारी के लिये चुनौती साबित होंगे क्षेत्र के सटटा किंग

मथुरा। जनपद में कोढ़ रूपी बीमारी के रूप में पनप रहं सट्टे के कारोबार को पुलिस रोक पाने में असफल ही साबित हो रही है। हालांकि जनपद की महिला पुलिस कप्तान की कार्यशैली पर किसी को कोई शक नहीं है लेकिन कप्तान के अधीनस्थ अधिकारी सट्टे के कारोबारियों से लाखों रूपये महावार लेकर इस सट्टे के कारोबार को खूब खाद पानी देने में लगे हुए हैं। शहर के विभिन्न गली मौहल्लों में चलने वाले सट्टे के कारोबार को पुलिस अपनी अतिरिक्त आमदनी का जरिया, समझ बैठी है और यही कारण है कि इससे जहां छोटे-छोटे अपराध बढ़ रहे है। इसी की लत में अनेक लोग भुखमरी के कगार पर आ चुके हैं। जनपद में आने वाला हर पुलिस अधिकारी यूं तो सट्टेबाजों से कढाई से निपटने का संकल्प दोहराता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि थाने और कोतवालियों पर तैनात पुलिस कर्मियों की अतिरिक्त आमदनी का साधन ही सटोरिये हैं। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से थानों से चिपके रहने के पीछे एक मात्र कारण अतिरिक्त आमदनी है। इतना ही नहीं गैर जनपद में तैनात पुलिस कर्मी आज भी मथुरा के सटोरियों से सीधी वसूली कर रहे हैं। 

जानकार सूत्रों ने बताया कि शहर के बड़े-बडे़ सटोरियों ने अपने अपने एजेण्ट विभिन्न क्षेत्रों में छोड़ रखे हैं। जो गली मौहल्ले और मुख्य बाजारों में चाय पान की दुकानों से पर्चियां व पैसे एकत्र कर अपने काम को अंजाम देते नजर आ सकते हैं। शहर के थाना गोविन्द नगर क्षेत्र के अन्तर्गत अर्जुन पुरा इलाके में शाम ढलते ही बावर्दी पुलिस कर्मियों के संरक्षण में सट्टे की खाईबाड़ी का आलम देखा जा सकता है। यहां सट्टे के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके काम पर सख्ती का कोई असर नहीं पड़ता। ऐसे ही हालात मनोहरपुरा और कोतवाली के सामने चैबिया पाड़ा क्षेत्र के भीहै। जहां देर रात तक सट्टा लगाने वालों की भीड़ लगी रहती है। सट्टे की खाई करने वालों के घरों पर ऐसे सटोरियों की भीड़ द्वारा शराब के नशे में गाली गलौज और हंगामा किये जाने से आये दिन गली मौहल्ले में अशांति का वातावरण उत्पन्न होता है लेकिन सट्टेबाजों की दबंगई के आगे कोई कुछ कहने का साहस नहीं जुटा पाता। सूत्रों ने बताया कि शहर में अर्जुनपुरा इलाके में पिछले लगभग दो दशक से भी अधिक समय से एक अल्पसंख्यक समुदाय के दबंग व्यक्ति द्वारा सट्टे की गद्दी ऐसे चलाई जा रही है जैसे सर्राफे का कारोबार चलाया जाता है। इस सटोरिये ने पिछले कुछ महीने थाना प्रभारी से सैटिंग न हो पाने के कारण अपना कारोबार बंद भी रखा लेकिन अब यह ठाठ से अपने काम को अंजाम दे रहा है। वहीं पास मेे ही मौजूद एक चाय की दुकान पर भी यहां आने वाले सटोरियों का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन पुलिस आज तक उसें पकड़ नहीं संकी है इसका मुख्य कारण है लाखों रूपयें माहवार देना। सट्टे के इस खेल में जहां अनेक मेहनतकश परिवार भुखमरी के कगार पर आ पहुंचे हैं वहीं अनेक लोगों को जीवकोपार्जन के लिए छुटपुट अपराधों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

वही नवागत क्षेत्राधिकारी आईपीएस अजय पाल शर्मा की यहां तैनाती से सटटे के कारोबार में लिप्त ये सटटा किंग कितना बच पायेंगे ये तो समय ही बतायेगा। वैसे तो नगर में क्षेत्राधिकारी अजयपाल शर्मा और उनकी कार्यशैली के चलते फिलहाल सटटा कारोबारियों में हडकम्प की स्थिति बनी हुई है लेकिन ये कितने दिनों तक रह पायेगी या फिर ये हड़कम्प किसी अंजाम तक पहंचेगा या नहीं ये अभी कोई नहीं कह सकता।

 


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