भगवान कभी अपने भक्त में दोष-विकार नहीं देखते- शंकर जी महाराज

गोवर्धन के रामानन्दाश्रम में भागवत कथा के दौरान प्रवचन करते भागवत प्रवक्ता सन्त शंकर जी महाराज

 

गोवर्धन। भागवत कथा का स्वाद मानव को लग जाए तो उसके सारे पाप, कष्ट दूर हो जाते हैं। मानव को अपना जीवन धन्य करने के लिए हर समय भगवत भजन करते रहना चाहिए तभी उसकी मुक्ति सम्भव है। भगवान कभी अपने भक्त में दोष-विकार नहीं देखते हैं।

उक्त विचार गिरिराज महाराज की तलहटी के आन्यौर परिक्रमा मार्ग स्थित रामानन्दाश्रम में भागवत कथा के अवसर पर खाम गांव महाराष्ट्र के जाग्रति आश्रम के सन्त शंकर जी महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि आप सभी श्रोताओं को भगवान गिरिराज महाराज की गोद में बैठकर भागवत कथा सुनने का मौका मिल रहा है। इस कार्यक्रम में भाग लेने से आप सभी भक्तगणों के सभी पाप एवं कष्ट दूर हो गए। उन्होंने कहा कि यह वही स्थल है जहाँ पर इन्द्र का अभिमान दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से गिरिराज जी महाराज की पूजा कराई। स्वंय भगवान श्रीकृष्ण ने एकरूप से गिरिराज जी की पूजा की तो दूसरे रूप में स्वंय पूजा कराई थी। जब इन्द्र देवता भगवान श्री कृष्ण की इस पूजा से नाराज हो गए और सम्पूर्ण ब्रजमण्डल में घनघोर बरसात कर ब्रज में प्रलय कर डाली लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कन्नी उंगली से सात कोस लम्बे पर्वत को उठा लिया और ब्रज की रक्षा की। जब इन्द्र को भगवान श्रीकृष्ण की इस लीला का ज्ञान हुआ तो तुरन्त वह भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आकर क्षमा-याचना मांगने लगे। वहीं द्वापर काल में गिरिराज जी के स्वरूप में ब्रज में दिया है। वह यही स्थल है। भागवत के दौरान रामानन्दाश्रम के महामंत्री महन्त पं० शंकरलाल चतुर्वेदी एवं संस्थान के अध्यक्ष राकेश चतुर्वेदी ने भागवत कथा की आरती उतारी और भागवत कथा में शिवलाल चतुर्वेदी, जगदीश राय, पुण्डलीका पाटिल, डा० हरकुट, भगवान राठी, बालूअवचार, देवेन्द्र मलकर, चन्द्रशेखर इंदौड आदि मौजूद थे।


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