गोवर्धन। गिरिराज धाम गोवर्धन में रविवार को दसविसा स्थित सुप्रसिद्ध मुकुट मुखारविंद मदिंर से श्री गिरिराज महाराज की पूजा अर्चना कर बैंड बाजो कक साथ भव्य कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। श्रीमद् भागवत के शुभारंभ के मौके पर दसविसा स्थित मुकुट मुखारविंद मंदिर पर भागवत किंकर हरिदास सोंमदत्त दीक्षित ठाकुर जी के सानिध्य मेें मंत्रोच्चारणों के बीच पूजा अर्चना की गई। इसके बाद आयोजकों द्वारा दूध,घी शहद, गंगा जल इत्यादी से बने पंचामृत से गिर्राज गिर्राज महाराज की क अर्चना कर दुग्धाभिषेक किया गया।
शोभायात्रा दसविसा के मुकुट मुखारविंद मंदिर से प्रारम्भ होकर, दसविसा, सौंख अड्डा, दानघाटी मंदिर, आन्यौर परिक्रमा होती हई तीर्थ विकास ट्रस्ट पहुंची, शोभायात्रा में श्रीमद् भागवत जी को धारण कर चल रहे थे। वहीं महिला पीत वस्त्र पहने हुये सिर पर 108 मंगल कलश धारण कर चले रहे थे। सैकडों भक्त बैंड बाजों की सुर मधुर धुन के बीच हरी नाम संर्कीतन के बीच झूमते हुये चल रहे थे। शोभायात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। शोभायात्रा हजारों की संख्या में भक्त शामिल हुए। कथा के प्रथम दिन भागवत भास्कर हरि सोमदत्त दीक्षित ठाकुर जी समस्त भक्तों को श्री मद् भागवत कथा का रसपान कराते हुए श्रीमद् भागवत कथा का महात्म समझाया। उन्होने ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा एक कल्प वृक्ष के समान है श्रीमद् भागवत के श्रवण से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। उन्होने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। श्रीमद् भागवत कथा के दशम स्कन्ध के पांच अध्याओं में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। अगर मनुष्य भगवान श्रीकृष्ण की इन लीलाओं का श्रवण कर ले तो निश्चित ही मनुष्य को उसके द्वारा किये सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और इस भव सागर से सहज ही पार हो सकता। अंत में आयोजकों द्वारा श्रीमद्भागवत जी की आरती उतारकार श्रीमद् भागवत जी को विश्राम दिया गया। इस मौके पर आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथि गृहस्थ संत रमाकांत गोस्वामी का फूल माला व दुपटृटा पहनाकर जोर दार स्वागत किया गया। रात्रि में परम पूज्य विभूषित परम पूज्य स्वामी हरगोविन्द स्वामी के निर्देन में रासलीला लीला का आयोजन किया गया। रासलीला के आयोजन पर रात्रि में सैकडों की संख्या में श्री कृष्ण की लीलाओं के सागर में भाव विभोर नजर आये। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में राधाकृष्ण सेवा समिति का विशेष योगदान रहा। आयोजक परिवार कृष्ण चरण अनुरागी, सत्य प्रकाश गुप्ता, देश बन्धु गुप्ता, विपिन गुप्ता, एवं सस्त गुप्ता परिवार व राधाकृष्ण सेवा समिति के सचिव पूरन चन्द कौशिक, सियाराम शर्मा, गणेश पहलवान, गिरधारी सेठी, प्रेम कौशिक, कृष्ण मुरारी शर्मा प्रबंधक तीर्थ विकास ट्रस्ट, राजू फौजी आदि थे।






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