मथुरा। आखिर उन मासूमों की क्या गलती थी जो पत्थर दिल मां-बाप सिर्फ शारीरिक रूप से अक्षम होने पर अपने कलेजे के टुकड़ों को वृन्दावन नगर में छोड़कर रफूचक्कर हो गये। मानवता इससे शर्मशार हुई है दोनों बच्चे कैसे किंकर्तव्यविमूढ़ हो स्वयं को देखने वालों में अपनों को तलाश रहे थे पर यहां तो सब अजनबी थे। सोचे इन मासूमों पर क्या बीत रही है। वृन्दावन में दो भाई-बहिनों को कोई लावारिस छोड़ गया। खूबसूरत, मासूम लेकिन शरीर से अक्षम किसी अच्छे परिवार से समद्ध बच्चों को कोई पत्थर हृदय वृन्दावन में छोड़ गया है। बस इन भोले-भालों की शरीर से अपंग होने की मजबूरी ने इन्हें आज दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर कर दिया है।
वृन्दावन में एक रिक्शा चालक को जब ये दो भाई-बहिन दिखाई पड़े तो वह सबसे सुरक्षित स्थान वृन्दावन कोतवाली लेकर उन्हें पहंुचा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। बच्चों से पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की मासूमों ने बताया कि वे दोनों बहिन-भाई है और चड़ीगढ़ के रहने वाले है। उन्हें नहीं पता कि यहां उन्हे कौन छोड़ गया? अपने पिता का नाम जानु चैहान और मां का नाम प्रीति बताते कहते है कि बहिन का नाम सृष्टि है और स्वयं लड़के का नाम कुनाल है। अब यह जानकारी बच्चे दे रहे है। वह कितनी सही है नहीं कही जा सकती लेकिन खूबसूरत और किसी अच्छे परिवार से दिखने वाले दोनों बहिन-भाई कपड़े भी ऐसे पहने है कि वे बढ़िया परिवार से हो लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम होने का उन्हे लगता है यह दण्ड और तिरस्कार मिला है। दोनों को देखने के लिये स्थानीय लोगों की कोतवाली में भीड़ लगी है। बाल विकास का काम कर रही अधिवक्ता और मजिस्ट्रेट प्रतिभा शर्मा भी वहां मौजूद थी वह भी इन बच्चों को उनके परिवार तक पहंुचाने के लिये पूरे प्रयास कर रही थी। पुलिस मजिस्ट्रेट और स्थानीय लोग सभी के मन में इन बच्चों के प्रति भारी प्यार उमड़ रहा था। लोग उनके पालनहारों को कोष रहे थे कैसे मासूम बच्चों को उन्होंने सिर्फ अपंगता के कारण सड़क पर ला दिया।






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