मुश्किल भरी डगर थी भारत के पहले अखबार की…

साल 1780 में 29 जनवरी के दिन भारत में पहली बार ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कर्मचारी जेम्स अगस्टस हिक्की ने ‘‘बंगाल गजट’’ या ‘‘दी कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर’’ नाम से अखबार कलकत्ता से प्रकाशित किया। इस समाचार पत्र को ‘‘हिक्की गजट’’ के भी नाम से जाना जाता है। यह अंग्रेजी भाषा में साप्ताहिक पत्र के रूप में प्रकाशित होता था। इस पत्र के प्रकाशन के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए हिक्की ने लिखा था कि ‘‘इसके प्रकाशन का उद्देश्य’’ न मात्र मेरी समाचार पत्र प्रकाशन की इच्छा अथवा रुझान है वरन् इसका उद्देश्य शारीरिक दासता के बदले मन और आत्मा की स्वतंत्रा को प्राप्त करना है।

इससे पहले समाचार पत्र ब्रिटेन से आते थे जो कि कई सप्ताह विलम्ब से भारत पहुंचते थे। हिक्की के इस पत्र को लोकप्रियता और पाठक वर्ग भी अधिक मात्रा में मिले। उसने इस समाचार पत्र की नीति ‘साप्ताहिक राजनीतिक एवं व्यवसायिक समाचार पत्र’ के रूप में घोषित की। यह पत्र बिना दबाव के सबके लिए ‘खुला’ भी घोषित किया। यह भारत का प्रथम आधुनिक ‘‘साप्ताहिक’’ समाचार पत्र था। यह समाचार पत्र दो पृष्ठों का 12 x 8 इंच के आकार में प्रकाशित होता था। हिक्की ने अपने इस समाचार पत्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स एवं उस समय के भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति इलीजा इम्पे तथा अन्य कम्पनी के कर्मचारियों के ऊपर विशेष रूप से प्रहार करना प्रारम्भ किया। इस प्रकार हिक्की गजट मुख्य रूप से ईस्ट इंडिया कम्पनी प्रशासन के खिलाफ था। अतः वारेन हेस्टिग्स ने हिक्की को चेतावनी भी दी परन्तु हिक्की प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के लिए निरन्तर आगे बढ़ते रहे। 14 नवम्बर, 1780 के एक आदेश के द्वारा हिक्की के समाचार पत्र को प्रदान की गयी डाक सुविधा भी समाप्त करने का आदेश वारेन हेस्टिंग्स ने दिया।
हिक्की को एक समाचार प्रकाशित करने के मामले में न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया परन्तु हिक्की निजी मुचलके पर रिहा हो गए। न्यायालय के नियमों के तहत हिक्की को दोषी पाया गया। उन्हें चार माह की सजा तथा 500 रुपये का जुर्माना किया गया। हिक्की समाचार पत्र को जेल से भी लिखते रहे। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के संचालकों की धारणा थी कि हिक्की के जेल में जाने के बाद समाचार पत्र का प्रकाशन बन्द हो जाएगा। परन्तु, उनकी यह धारणा निराधार निकली और समाचार पत्र नियमित प्रकाशित होता रहा। हिक्की के समाचार पत्र से परेशान होकर वारेन हेस्टिंग्स और इम्पे ने इसे बन्द कराने की ठान ली। हिक्की पर जुर्मानों और जेल की सजा का दौर चला। हिक्की की आर्थिक दशा इस प्रकार की नहीं थी कि वह अधिक दिनों तक शासन से लड़ सकें। परिणामत: मार्च 1782 को बंगाल गजेट प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस प्रकार भारत का प्रथम नियमित समाचार पत्र समाप्त हो गया।

Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login






Mediabharti