यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा का हुआ आगाज

शंख की ध्वनि, ढोलक की ताल, हारमोनियम का स्वर और इसके साथ मेघों की गर्जना कुछ इस तरह के वातावरण में आगाज हुआ यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा का। यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा 15 मार्च को सुबह 12 बजे तेज बरसात के बावजूद कोसीकलाँ अनाज मण्डी से प्रारम्भ हुयी। जब यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा ने कोसी से दिल्ली की ओर रूख किया तो नजारा देखने योग्य था। हजारों पदयात्रियों की किलो मीटर लम्बी कतार एक जन सुनामाी का आभास करा रही थी जो शनैः शनैः दिल्ली की ओर बढी जा रही है। विरक्त संत श्री रमेश बाबा महाराज ने कोसीकलाँ अनाज मण्डी पहुॅच यात्रा की अगुवाई करते हुये यात्रा को हरी झण्डी दिखाई। इस मौके पर पुष्टिमार्ग के आचार्य श्री सूरत से आये वल्लभ राय जी महाराज, चतुःसम्प्रदाय श्री महन्त फुलडोल दास महाराज, महामण्डलेश्वर श्री चितप्रकाशानन्द, यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री, भाकियू भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह, उत्तरप्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री चै. लक्ष्मीनारायण, भागवत व्यास देवकी नन्दन ठाकुर जी, चतुर्वेदी गोपाल पीठ के श्री पुरूषोत्तम महाराज, कथाव्यास मृदुलकान्त शास्त्री, एम.एल.सी लेखराज सिंह, विधायक पूरन प्रकाश, कांग्रीसी नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह, विशेष तौर पर उपस्थित रहे। 

  विरक्त संत श्री रमेश बाबा महाराज ने यात्रा के प्रारम्भ में सम्बोधन करते हुये कहा कि इस बार की पदयात्रा का लक्ष्य केवल शुद्ध यमुनोत्री का जल प्रवाह ब्रज में लाना है और इस उद्देश्य की पूर्ति में जितनी भी कठिनाईयाँ उनका सामना करते हुये हरिनाम संकीर्तन के बल पर सभी को आगे बढना है। आप सभी को निश्चित सफलता मिलेगी और यमुना जी ब्रज में आकर ही रहेगी। इसलिये पदयात्रा प्रारम्भ करो और लक्ष्य प्राप्ति तक अनवरत प्रयास करते रहे। 

यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री एवं भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने पदयात्रियों और कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमें अनुशासन का पूर्ण ध्यान रखना है। उन्होने पदयात्रियों को यात्रा के नियम और रूपरेखा के विषय में बताते हुये सभी पूरी शान्ति और अनुशासन के साथ हरिनाम लेते हुये आगे चलने को कहा।

पदयात्रा में प्रसिद्ध भागवताचार्य श्री देवकी नन्दन जी महाराज, श्री कृष्ण सलिल जी महाराज, आचार्य श्री बद्रीश जी, श्री मृदुल कान्त शास्त्री जी, श्री पंकज शास्त्री ने कहा कि यह यात्रा एक आध्यात्मिक पदयात्रा को श्री यमुना जी के ब्रज में पुनः आगमन हेतु की जा रही है इसमें सम्मिलित प्रत्येक व्यंिक्त सम्मानिय है । यह महायज्ञ है जिसमें प्रत्येक पदयात्री अपनी आहूति दे पुण्य भागी बन रहा है।  

चतुः सम्प्रदाय श्रीमहन्त फुलडोल बिहारी जी महाराज, महामण्डलेश्वर श्री चित्प्रकाशानन्द जी महाराज, पनकी मन्दिर के महन्त पूज्य श्री जितेनदास जी महाराज ने कहा कि श्री यमुना जी श्री कृष्ण की पटरानी है उनकी सेवा के लिये की जा रही यह पदयात्रा महायज्ञ है। 

अभियान के राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ, राष्ट्रीय संगठन मंत्री कुंवर नरेन्द्र सिंह, राष्ट्रीय सलाहकार डी.पी चतुर्वेदी ,प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, ने कहा कि मर जायेगे मिट जायेगे पर इस बार यमुना जल लिये बिना पीछे नहीं हटेगें।  

इस अवसर पर भाकियू भानू के राष्ट्रीय राजेन्द्र शास्त्री जी, भाजपा नेता तरूण सेठ, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ धर्मवीर अग्रवाल, छाता चैयरमैन जगपाल सिंह, कोसी के चेयरमैन भगवद् प्रसाद रोहेला,वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुक्खी सिंह, श्री रमेंशकृष्ण शास्त्री,  भाकियू भानू के उत्तराखण्ड प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा , अजय सिकरवार, सुरेन्द्र प्रधान, जिला संयोजक पंकज चतुर्वेदी, महेन्द्र राजपूत, राज शर्मा, राजेन्द्र सक्सैना, रमेश सिकरवार, गिरधारीलाल, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। 

पदयात्रा का जगह जगह हुआ भव्य स्वागत 

यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा का स्थानीय लोगों द्वारा जगह जगह भव्य स्वागत किया गया। फूल मालाओं एवं पुष्पवर्षा कर पदयात्रियों का स्वागत किया गया साथ ही स्वागत कर्ताओं द्वारा पदयात्रियों को चाय, बिस्किट, नमकीन और फलाहार भी दिया गया। कोटवन बार्डर पर पूज्य श्री मौनी बाबा और उनके अनुयायियों द्वारा पदयात्रियों का स्वागत किया गया। पदयात्रा में साधु-सन्तों का माल्यार्पण एवं पुष्पवर्षा कर पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया गया इसके बाद पदयात्रियों का हरियाणा में प्रवेश के बाद हताना ग्राम के भूरा प्रधान द्वारा पदयात्रियों पर पुष्पवर्षा व फलाहार द्वारा पदयात्रियों का भव्य स्वागत किया गया। करमन बार्डर पर प्रवेश करते ही हाथीन के विधायक केहरी सिंह ने अपने समर्थकों की भारी भीड के साथ यात्रा में स्वागत कर सम्मिलित हुये। होडल में यात्रा के प्रवेश करते ही डबचिक चैराहे पर होडल के चैयरमैन जयसिह ने अपने सैकडो समर्थकों के साथ यमुना यात्रा का भव्य स्वागत किया और यात्रा में शामिल होने का संकल्प लिया। 

ब्रजवासियों से आज फिर हारे मेघ, यमुना भक्तों के आगे  मौसम की एक न चली

कहते है कि भक्ती और श्रद्धा की भी एक दिन कसौटी पर खरा उतरना होता है। हर भक्त के मन में उसके ईष्ट के प्रति कितना अगाध विश्वास है इसकी परीक्षा प्रतिकूल और विषम परिस्थितियों में होती है और उसी कसौटी पर खरा उतरकर वह भक्त परम पद को प्राप्त करता है। 14 मार्च को यमुना भक्तों की महापंचायत हुयी मेघों का रंग श्वेत से श्यामल होता गया पर भक्तों का हृदय में तनिक भी शंका उत्पन्न नहीं हुयी महापंचायत की दोपहर में मेघों ने अपने नीर से यमुना भक्तों विचलित करने की कोशिश की परन्तु फिर भी भक्त नहीं हटे महापंचायत सम्पूर्ण हुयी। गुस्साये मेघों ने शनिवार की शाम को अपना रूप दिखया और कोसी में ठहरे यमुना भक्तों के पडाव स्थल को जल मग्न करने लगा परन्तु उसकी यह चाल भी काम नही। मौसम ने बेईमानी करते हुये पदयात्रियों का पण्डाल और रावटियों को गिरा दिया जो बची उनमें भक्त खडें होकर पानी से बचने की कोशिश कर रहे थें। यमुना मुक्तिकरण अभियान के कार्यकर्ताओं द्वारा सक्रियता दिखाते हुये पदयात्रियों को जल्द ही रात्रि में ही ट्रकों और बसों के माध्यम से कोसी की धर्मशालाओं और गैस्ट हाउसों में ठहरवाया। उम्मीद थी कि इन्द्र देवता कल यानि 15 मार्च की ऐतिहासिक घड़ी को कृपा करेगें और यह भी उम्मीद थी कि श्री यमुना तात सूर्य देवता अपने दर्शन दे । परन्तु ब्रजवासियों और यमुना भक्तों के इम्तिहान अभी खतम नहीं हुआ। सुबह आँख खुलते ही घनघोर श्यामल मेघ मुस्कारते नजर आये। हजारों पदयात्री दिल्ली कूच के लिये बेशब्री से इन्तजार कर रहे थे। उन्हे मौसम की मेहबानी का इन्तजार भारी पड़ रहा था। इसलिये यमुना मुक्तिकरण पदयात्रियों बरसते हुये पानी में ही अपनी यात्रा दिल्ली की ओर कूच कर दिया। प्रशासन को बरसती बरसात उनकी परेशानियों को कम करने वाला मरहम लग रही थी परन्तु अपने इरादे के पक्के यमुना भक्तों ने किसी भी विषम परिस्थिति की कोई चिन्ता न करते हुये श्यामल मेघों की आंखों में आंखे डाल हजारों पदयात्रियों का काफिला पदयात्रा करते हुये आगे बढने लगा। मेघों की गर्जना यमुना मैया के जयकारों के सामने फीकी पड रही थी। शायद इन्द्र को भी यमुना मुक्ति के इस अद्भुत और अद्वितिय यज्ञ में जा रहे पदयात्रियों की तपस्या से डर लगने लगा था। तभी पूरी यात्रा के दौरान वह जल की वर्षा करता रहा। 

देखने लायक था पदयात्रियों का उत्साह  

भारी जल वर्षा के बीच दिल्ली की ओर बढते यमुना पदयात्रियों का उत्साह देखने लायक था। जिस मौसम में सामान्य लोग गरम पकौड़ी की घर में आराम बैठ मांग करते है। उस मौसम में पदयात्री भीगते हुये आगे बढ रहे थे। मानों ऐसा लग रहा है कि पदयात्रियों के शरीर पर पड़ने वाली एक एक बूंद उनमें एक नई शक्ति का संचार कर रही थी। जैसे जैसे वारिश का वेग बढ रहा था वैसे वैसे पदयात्री और अधिक रोमान्चित हो हरिनाम संकीर्तन पर थिरकने लगे। नृत्य करती ब्रजबालायें वातावरण में अलौकिक आनन्द घोल रही थी। वेदपाठी ब्राह्मण बालकों के मंत्रोच्चारण व शंखनाद  पदयात्रियों को बल प्रदान कर रहे था। हजारों पदयात्रियों की कतार एक जनसमुद्र का आभास करा रही थी। 

हाथ - पैर से विकलांग पदयात्रि वे भी 

यमुना की पीर आज समस्त यमुना भक्तों को आहत किये हुये। यमुना मुक्तिकरण पदयात्री में ऐसे पदयात्री भी सम्मिलित है जो हाथ पैर से विकलांग है फिर भी बडी उत्साह और उमंग के साथ पदयात्रा में आगे बढ रहे है। 

घोडि़यों के नृत्य रहा पदयात्रियों का आकर्षण  

यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में चल रही घोड़े पदयात्रा में आकर्षण का केन्द्र रहे। घोडियों द्वारा किया गया नृत्य लोगो को खूब लुभा रहा है। भजन संकीर्तन की धुन पर नाचती घोडि़या माहौल को और अधिक रोमान्चक बना रही है। 

पदयात्रा में हुयी पटेबाजी, लठ्ठबाजी ने लुभाया पदयात्रियों का मन 

यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में युवाओं द्वारा लठ्ठबाजी और तलवार बाजी कर पदयात्रा में सम्मिलित सभी ब्रजवासी और किसानों के मन को लुभाया। युवाओ द्वारा अपने कौशल द्वारा लठ्ठबाजी का अद्भुत नजारा प्रस्तुत किया। 

रात्री में पदयात्रियों ने रासलीला का आनन्द 

पदयात्रा के 15 मार्च के पड़ाव स्थल होडल के त्यागी मोर्डन स्कूल में रहा। पदयात्रियों के मनोंरंजन के लिये यमुना मुक्तिकरण अभियान द्वारा रासलीला का आयोजन किया गया। रास लीला सांय 7 बजे से प्रारम्भ हुयी। 

 


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