मथुरा। रिफाइनरी में कार्यरत समस्त ठेका कर्मी जो कि पिछलें तीन दशक से लगातार रिफाइनरी में कार्य करते रहें है परन्तु इसके बाद भी रिफाइनरी प्रबन्धन मजदूरों का शोषण कर रहा हैं। न्यायालय द्वारा इसे लेकर दिये गये आदेशों का भी लगातार उल्लघन किया जा रहा हैं। सर्वोच्च न्यायालय 1991 में सामान कार्य के सामान वेतन का आदेश एवं उच्च न्यायालय इलाहाबाद 2012 में न्यूनतम लीस्ट पेमेन्ट आॅफ प्रन्सीपल कर्मचारी आॅफ आईओसीएल सीजीआईटी कानपुर द्वारा 2011 में रिफाइनरी कर्मचारियों के बराबरा ठेका श्रमिकों को वेतन दिये जाने के आदेश भी हो चुके हैं। उसकी डिक्री होकर जिला जज मथुरा को फरवरी 2014 में आ चुके हैं। इसके बाद भी प्रबन्धन द्वारा आदेशों का उल्लघन किया जा रहा हैं। पिछलें तीन दशकों में विभिन्न सरकारें आई लेकिन किसी भी सांसद व विद्यायक ने इन मजदूरों के दुखों को नहीं सुना। अतः श्रमिकों ने जो कि 12 की संख्या में है और परिवार सहित लगभग 20 हजार मतदाता जुड़ें हे। और इस बार मतदान करने का निर्णय लिया हैं। उक्त जानकारी अध्यक्ष राजसिंह यादव ने निर्णय के लिए आयोजित बैठक के बाद दी हैं।





