श्रीनाथजी को ब्रज की यमुना जी का जल घराया जाता था जो कि अब विगत 11 वर्षों से बन्द है?

देष की राजधानी दिल्ली में यमुना

 

श्रीनाथ बाबा को अरोगने हेतु नीचे पधरायी गई झारीजी एवं बंटा

गोकुल में 2003 में निर्मित ’गोकुल बैराज’ जिसके बनने से यमुना मेंभारी प्रदूशण बढ़ा  

 मथुरा का श्रीमदनमोहनजी का घाट जहाँ से पधराकर श्रीयमुनाजल लाया जाता था  

 

ब्रज क्षेत्र से श्रीनाथ जी बाबा को झारीजी में आरोगने को यमुना जल पधराकर लाया जाता था जो कि विगत 11 वर्षों से ब्रज क्षेत्र में प्रदूषण के चलते अब बन्द है। उल्लेखनीय है कि ब्रजक्षेत्र में श्रीयमुना जी का अधिदैविक स्वरूप है एवं श्रीयमुनाजी भगवान् श्रीकृष्ण की चतुर्थ प्रिया हैं। अनादिकाल से अर्थात् जब से श्रीनाथजी को मीराबाई पधराकर ब्रज से लाई तब से ही बैलगाड़ी के माध्यम से श्रीनाथजी को झारीजी में अरोगने के लिए ब्रज से श्रीयमुना जल की गागर पधराकर लाई जाती रही थी। और उसी यमुनाजी के आधिदैविक स्वरूप से श्रीनाथजी की झारीजी भरी जाती रही है। यह बैलगाड़ी लगभग 10-11 दिनों के अन्तराल में नाथद्वारा पहुँच पाती थी।

सत्तर के दशक से जब राजस्थान राज्य परिवहन निगम ने वृन्दावन उदयपुर बस सेवा प्रारम्भ की तो बस में ही चालक की सीट के पास ही एक केबिन बनाया गया था जिसमें अपरस में मथुरा के श्रीमदनमोहनजी के घाट से भरकर गागर में श्रीयमुना जल पधराकर लाया जाने लगा था जो कि प्रतिदिन उसी दिन श्रीनाथ जी के मन्दिर में पहुँचता था। बाद में जब उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन की बस सेवा प्रारम्भ हुई तो उस बस में भी यही व्यवस्था की गई आज भी एक दिन राजस्थान परिवहन तो एक दिन उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन की बस सेवा उदयपुर तक आती है परन्तु सन् 2003 में जब से मथुरा में गोकुल नामक स्थान पर यमुना नदी के ऊपर एक बैराज का निर्माण किया गया है तब से यमुना में पानी का प्रवाह रुक जाने के कारण इतना अधिक प्रदूषण बढ़ गया है कि श्रीनाथजी ने उस प्रदूषित जल को अरोगना ही बन्द कर दिया।

 तब से हरियाणा के यमुनानगर के निकट से लारी के माध्यम से यमुनाजल जो कि यमुना का मात्र नदी जल स्वरूप ही है न कि ब्रज की यमुना का आधिदैविक स्वरूप आज श्रीनाथजी को झारी जी में धराया जाता है। श्रीनाथजी के पूर्व बड़े मुखियाजी श्री नरहरि पी. ठाकर ने जो कि ब्रज लाइफ लाइन वैलफेयर नामक संस्था के सदस्य एवं संरक्षक मण्डल में भी शामिल हैं ने संस्था के संयोजक महेन्द्रनाथ चतुर्वेदी के समक्ष अपनी पीड़ा ज़ाहिर करते हुए कहा कि चतुर्वेदीजी आज श्रीनाथजी बाबा को ब्रज की आधिदैविक रूवरूप की श्रीयमुनाजी झारीजी में पिछले 11 वर्षों से नहीं धरायी जाती है। पूर्व मुखियाजी ने भारी मन से कहा कि हमने यमुनानगर में पानी की जाँच कराकर झारीजी के जल की व्यवस्था तो कर ली है परन्तु पता नहीं श्रीजीबाबा को ब्रज की आधिदैविक स्वरूप की श्रीयमुनाजी अरोगने हेतु कब उपलब्ध होगी कुछ कह नहीं सकते।

उल्लेखनीय है कि ब्रज लाइफ लाइन वैलफेयर नामक संस्था यमुना प्रदूशण की लड़ाई पिछले तीन दषक से अधिक समय से लगभग 32 वर्षों से लड़ रही है जिसे देष की शीर्ष अदालत ने 8 मार्च 2013 को स्वयं के दाखिल यमुना प्रदूषण के केस संख्या 725/1994 में पार्टी के रूप में सामने से संस्था को दो बार एडवाइज देकर शामिल कर लिया है। ब्रज लाइफ लाइन वैलफेयर संस्था के संयोजक श्री चतुर्वेदी के अनुसार आज सरकारों को लोगों की धार्मिक भवनाओं का जरा भी ध्यान नहीं है। आज देष के सभी वल्लभकुल सम्प्रदाय के मंदिरों में झारी जी के लिए जल हथिनीकुण्ड से मँगवाना प्रारम्भ कर दिया है जिससे वैष्णवों की धर्मिक भावनाएँ आहत हो रहीं हैं। 

 


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