शिक्षा से नयी पीढ़ी को महकाने वाले रामेश्वर प्रसाद शर्मा को सम्मानित करते सन्त बाल योगेश्वर दास जी महाराज
गोवर्धन। शिक्षा, लेखनी, कवित्व, विकास, भगवत रस वर्षा में ब्रज का गौरव बढ़ाने वाली विभूतियों से सजी सूर श्याम स्थली का प्रांगण नव संवत्सर की पावन बेला पर स्वर्णिम आभा बिखेरता नजर आया। शनिवार को सूर की साधना स्थली परासौली में संरक्षण सेवा एवं शोध संस्थान द्वारा मानव सेवा के प्रकल्पों में सहभागिता निभाने वाली पांच विभूतियों को ब्रज रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत बालक योगेश्वर दास एवं ब्रजभूषण उपाध्याय ने भगवान श्रीकृष्ण एवं भगवान गणेश के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। पण्डित हितेन्द्र कटारा ने संवत्सर वाचन किया। संस्था के सचिव गोपाल प्रसाद उपाध्याय ने नव संवत्सर पर आयोजित ब्रज रत्न सम्मान पर प्रकाश डाला तथा पंच परमेश्वर की संज्ञा देते हुये पांच लोगों को सम्मानित किया। प्रसिद्ध कवि देवकी नंदन कुम्हेरिया ने शब्दों को कविता में पिरोकर समाज सेवा का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संत बालक योगेश्वर दास तथा संचालन विनोद दीक्षित ने किया। संरक्षण सेवा एवं शोध संस्थान द्वारा ब्रज का गौरव बढ़ाने वालों को विभिन्न सेवा प्रकल्पों में योगदान के लिए ब्रज रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। भागवत कथा के दौरान गोसेवा एवं ब्रज को संरक्षित करने का संदेश देने वाले भागवताचार्य श्याम लाल शास्त्री को गोकूलदास शास्त्री की स्मृति में। कविता के माध्यम से ब्रज साहित्य को देशभर में पहुंचाने वाले हरिबाबू ओम को रेवतीरमण चेत की स्मृति में। शिक्षा के पुष्पों से नयी पीढ़ी को महकाने वाले रामेश्वर प्रसाद शर्मा को शिक्षित भारत की मुहिम के संदर्भ में। गिरिराज जोशी, नंद किशोर शर्मा एडवोकेट, रमेश चन्द शर्मा, राम लखन शर्मा, हरिशंकर, हरिबल्लभ, राजेन्द्र प्रसाद बिरला, राधा गोविंद, श्रीबाबू कौशिक, सुरेश शास्त्री, श्री राधाकृष्ण सेवा समिति के सचिव एवं सर्व ब्राम्हण महासभा के जिलाध्यक्ष पूरन कौशिक, गोविंद राम आदि तमाम लोग मौजूद थे।





